Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
8 Jul 2023 · 1 min read

*घर में बैठे रह गए , नेता गड़बड़ दास* (हास्य कुंडलिया

घर में बैठे रह गए , नेता गड़बड़ दास (हास्य कुंडलिया)
___________________________
घर में बैठे रह गए , नेता गड़बड़ दास
मंत्री-पद की अब नहीं ,बाकी कोई आस
बाकी कोई आस ,दाँव कुछ काम न आया
शपथ हो गई पूर्ण , देखकर दिल घबराया
कहते रवि कविराय ,स्वप्न टूटे क्षण-भर में
पहने अचकन खास , रह गए बैठे घर में
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 9997615451

133 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ravi Prakash
View all
You may also like:
प्रथम किरण नव वर्ष की।
प्रथम किरण नव वर्ष की।
Vedha Singh
विराम चिह्न
विराम चिह्न
Neelam Sharma
दर्द ए दिल बयां करु किससे,
दर्द ए दिल बयां करु किससे,
Radha jha
3432⚘ *पूर्णिका* ⚘
3432⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
!! उमंग !!
!! उमंग !!
Akash Yadav
जब किसी कार्य के लिए कदम आगे बढ़ाने से पूर्व ही आप अपने पक्ष
जब किसी कार्य के लिए कदम आगे बढ़ाने से पूर्व ही आप अपने पक्ष
Paras Nath Jha
मुहब्बत के शहर में कोई शराब लाया, कोई शबाब लाया,
मुहब्बत के शहर में कोई शराब लाया, कोई शबाब लाया,
डी. के. निवातिया
जब तुम एक बड़े मकसद को लेकर चलते हो तो छोटी छोटी बाधाएं तुम्
जब तुम एक बड़े मकसद को लेकर चलते हो तो छोटी छोटी बाधाएं तुम्
Drjavedkhan
‌‌भक्ति में शक्ति
‌‌भक्ति में शक्ति
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
लहरे बहुत है दिल मे दबा कर रखा है , काश ! जाना होता है, समुन
लहरे बहुत है दिल मे दबा कर रखा है , काश ! जाना होता है, समुन
Rohit yadav
सावन भादो
सावन भादो
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
माना जिंदगी चलने का नाम है
माना जिंदगी चलने का नाम है
Dheerja Sharma
*समय की रेत ने पद-चिन्ह, कब किसके टिकाए हैं (हिंदी गजल)*
*समय की रेत ने पद-चिन्ह, कब किसके टिकाए हैं (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
मैं मन की भावनाओं के मुताबिक शब्द चुनती हूँ
मैं मन की भावनाओं के मुताबिक शब्द चुनती हूँ
Dr Archana Gupta
-अपनो के घाव -
-अपनो के घाव -
bharat gehlot
रेतीले तपते गर्म रास्ते
रेतीले तपते गर्म रास्ते
Atul "Krishn"
सावन और साजन
सावन और साजन
Ram Krishan Rastogi
चेहरा
चेहरा
नन्दलाल सुथार "राही"
लर्जिश बड़ी है जुबान -ए -मोहब्बत में अब तो
लर्जिश बड़ी है जुबान -ए -मोहब्बत में अब तो
सिद्धार्थ गोरखपुरी
■ देश भर के जनाक्रोश को शब्द देने का प्रयास।
■ देश भर के जनाक्रोश को शब्द देने का प्रयास।
*Author प्रणय प्रभात*
*लव इज लाईफ*
*लव इज लाईफ*
Dushyant Kumar
लड़के रोते नही तो क्या उन को दर्द नही होता
लड़के रोते नही तो क्या उन को दर्द नही होता
Sandhya Chaturvedi(काव्यसंध्या)
कोरोना चालीसा
कोरोना चालीसा
नंदलाल सिंह 'कांतिपति'
तेरी धरती का खा रहे हैं हम
तेरी धरती का खा रहे हैं हम
नूरफातिमा खातून नूरी
माफ़ कर दो दीवाने को
माफ़ कर दो दीवाने को
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
शायद कुछ अपने ही बेगाने हो गये हैं
शायद कुछ अपने ही बेगाने हो गये हैं
Ravi Ghayal
Thought
Thought
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
* मुक्तक *
* मुक्तक *
surenderpal vaidya
पत्र
पत्र
लक्ष्मी सिंह
बर्दाश्त की हद
बर्दाश्त की हद
Shekhar Chandra Mitra
Loading...