Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
25 May 2020 · 2 min read

गीता के स्वर (2) शरीर और आत्मा

पार्थ !
बिना अवसर के शोक क्यों ?
और प्रारम्भ हुआ
‘गीताशास्त्र’ का अद्वितीय उपदेश-
‘गतासु’- मरणशील शरीर और
‘अगतासु’- अविनाशी आत्मा के लिए
शोक क्यों ?
‘आत्मा’ नित्य है और सत्य भी,
वह अप्रमेय है
मुक्त है-
जन्म-मृत्यु के बन्धन से
वह न जन्मता है और न मरता है
अविनाशी है.
फिर-
मोहित हो धर्मयुद्ध से पृथक् क्यों ?
शोक क्यों ?
वांसासि जीर्णानि यथा विहाय…..
अर्थात्
पुराने वस्त्रों का त्याग व नए को धारण करना
यही तो है ‘आत्मा’ की भी प्रकृति
जर्जर शरीर का त्याग व नए में प्रवेश.
यह क्रम चलता रहता है,
चक्र की भाँति
क्रमशः

‘आत्मा’
अच्छेद्य, अदाह्य, अक्लेद्य और अशोष्य है
जन्मे की मृत्यु
और मृत्यु प्राप्त का जन्म अटल है.
महाबाहो !
फिर शोक क्यों ?
यह धर्मरूप संग्राम है
इससे पृथक् होना
‘अकीर्तिकी’ को मार्ग प्रशस्त करेगा.
पार्थ !
‘अकीर्तिकी’
प्रतिष्ठित के लिए
अधिक कष्टकारी है
‘मृत्यु’ समान
हे कुरूनन्दन !
सुख-दुःख, लाभ-हानि, जय-पराजय
सबको समान समझ
युद्ध का वरण कर.
…..
धनंजय !
अधिकारिता है ‘कर्म’ पर
‘फल’ पर कहाँ ?
सिद्धि व असिद्धि की समता
‘योग’ को परिभाषित करता है
पार्थ !
‘स्थितिप्रज्ञ’ हो
अर्थात्
आत्म स्वरूप के चिन्तन में मग्न हो
समस्त कामनाओं को त्याग.
दुःख में उद्वेगरहित
सुख में स्पृहारहित
राग, भय व क्रोध से रहित
‘मुनि’
‘स्थिरबुद्धि’ कहलाता है.
प्रबल होती हैं-‘इन्द्रियाँ’
बुद्धिमान के मन का भी
हरण करने में सक्षम
पर ‘स्थिरबुद्धि’
इन वाचाल इन्द्रियों को ही
वश में कर लेता है
वह सक्षम है
ऐसा करने में.
…….
(अच्छेद्य- जिसका छेदन न हो सके/काटा न जा सके. अदाह्य- जिसे जलाया न जा सके. अक्लेद्य- जिसे गलाया न जा सके. अशोष्य- जिसे सुखाया न जा सके.)

Language: Hindi
3 Likes · 605 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from डा. सूर्यनारायण पाण्डेय
View all
You may also like:
गीतिका
गीतिका
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
एक ऐसी दुनिया बनाऊँगा ,
एक ऐसी दुनिया बनाऊँगा ,
Rohit yadav
तेरे जन्म दिवस पर सजनी
तेरे जन्म दिवस पर सजनी
Satish Srijan
बहारों कि बरखा
बहारों कि बरखा
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
काश कभी ऐसा हो पाता
काश कभी ऐसा हो पाता
Rajeev Dutta
* मैं बिटिया हूँ *
* मैं बिटिया हूँ *
Mukta Rashmi
*
*"माँ कात्यायनी'*
Shashi kala vyas
बहुत नफा हुआ उसके जाने से मेरा।
बहुत नफा हुआ उसके जाने से मेरा।
शिव प्रताप लोधी
काले समय का सवेरा ।
काले समय का सवेरा ।
Nishant prakhar
सावरकर ने लिखा 1857 की क्रान्ति का इतिहास
सावरकर ने लिखा 1857 की क्रान्ति का इतिहास
कवि रमेशराज
क्या क्या बताए कितने सितम किए तुमने
क्या क्या बताए कितने सितम किए तुमने
Kumar lalit
चिन्तन का आकाश
चिन्तन का आकाश
Dr. Kishan tandon kranti
अहमियत इसको
अहमियत इसको
Dr fauzia Naseem shad
#प्रेरक_प्रसंग
#प्रेरक_प्रसंग
*प्रणय प्रभात*
सितमज़रीफ़ी
सितमज़रीफ़ी
Atul "Krishn"
If you do things the same way you've always done them, you'l
If you do things the same way you've always done them, you'l
Vipin Singh
सोच समझकर कीजिए,
सोच समझकर कीजिए,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
जागृति
जागृति
Shyam Sundar Subramanian
मतदान कीजिए (व्यंग्य)
मतदान कीजिए (व्यंग्य)
सत्यम प्रकाश 'ऋतुपर्ण'
सेंगोल और संसद
सेंगोल और संसद
Damini Narayan Singh
सुविचार
सुविचार
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
*अगवा कर लिया है सूरज को बादलों ने...,*
*अगवा कर लिया है सूरज को बादलों ने...,*
AVINASH (Avi...) MEHRA
दुनियां का सबसे मुश्किल काम है,
दुनियां का सबसे मुश्किल काम है,
Manoj Mahato
एक अकेला
एक अकेला
Punam Pande
आप वही करें जिससे आपको प्रसन्नता मिलती है।
आप वही करें जिससे आपको प्रसन्नता मिलती है।
लक्ष्मी सिंह
मनुष्य और प्रकृति
मनुष्य और प्रकृति
Sanjay ' शून्य'
जय महादेव
जय महादेव
Shaily
बेहतर है गुमनाम रहूं,
बेहतर है गुमनाम रहूं,
Amit Pathak
मिलेगा हमको क्या तुमसे, प्यार अगर हम करें
मिलेगा हमको क्या तुमसे, प्यार अगर हम करें
gurudeenverma198
छल
छल
Aman Kumar Holy
Loading...