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22 Jun 2023 · 1 min read

गाली / मुसाफिर BAITHA

जब हम किसी को
दे रहे होते हैं गाली
तो केवल और केवल
उसे ही पीड़ा पहुंचाने का
ध्येय रहता है हमारा
और अपना मन हल्का करने का
जबकि हम अपनी गाली
बेशक महज लक्षित पर ही
नहीं रख पाते केन्द्रित

गेहूं के साथ जैसे
पिस जाता है घुन
उसी तरह
बकी गाली का
आयास अनायास लक्षित के
अगल-बगल आस-पड़ोस सगे-संबंधी
यहां तक कि कहीं अगम अगोचर
और दूर बहुत दूर तलक भी
पसर जाता है उसका संक्रामक प्रभाव
और करता है कोई भरता है कोई
जबकि औरों ने हमारा
कुछ नहीं बिगाड़ा होता
जैसे
मां-बहन बेटा-बेटी साला-साली रिश्ते-नातों की
अंतड़ी-छेद गालियां देकर हम
कुछ ऐसा ही कर रहे होते हैं

गालिबन
गालियों का स्वभाव ही है ऐसा
कि वे उद्दाम उच्छृंखल होती हैं
अपने प्रभाव की तरह और
अपने को किसी ऊंच-नीच, सही-गलत के
खांचे में बंधकर देखे जाने में
नहीं रखतीं वे हरगिज यकीन ।

Language: Hindi
174 Views
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