Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
12 Jun 2016 · 1 min read

ग़ज़ल :– ये नीर नहीं इन आँखों के !!

ग़ज़ल –: ये नीर नही इन आखों के !!
:– अनुज तिवारी “इन्दवार”

हम डूब रहे मझधारे पर मुश्किल से भरे किनारे है !
ये नीर नही हैं आखों के ये तो गिरते अन्गारे हैं !!

हँस कर पार किये थे हम बडे-बडे तूफानो को !
अपनो ने जख्मी किये हर लम्हे यहां गवारे हैं!!

आज भँवर मे फसे-फसे हम चीख रहे चिल्ला रहे !
बचना शायद मुश्किल होगा ये नफरत के गलियारे है !!

समझ रहे थे जैसे सावन शीतल निर्मल मनभावन !
ये तपती तेज दुपहरी मे ज्वाला की बौछारें है !!

नातों के नाजुक ये बंधन ढह ना जाये ठोकर से !
जरा सम्हल कर रहना तुम ये सीसे की दीवारे हैं !!

1 Like · 490 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Anuj Tiwari
View all
You may also like:
ग़ज़ल सगीर
ग़ज़ल सगीर
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
ज़िंदगी फिर भी हमें
ज़िंदगी फिर भी हमें
Dr fauzia Naseem shad
// होली में ......
// होली में ......
Chinta netam " मन "
सुबह और शाम मौसम के साथ हैं
सुबह और शाम मौसम के साथ हैं
Neeraj Agarwal
खिलौने भी तब मिले
खिलौने भी तब मिले
Satish Srijan
मैं उसी पल मर जाऊंगा ,
मैं उसी पल मर जाऊंगा ,
श्याम सिंह बिष्ट
तू सहारा बन
तू सहारा बन
Bodhisatva kastooriya
विचार , हिंदी शायरी
विचार , हिंदी शायरी
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
बेटा हिन्द का हूँ
बेटा हिन्द का हूँ
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
माँ तेरा ना होना
माँ तेरा ना होना
shivam kumar mishra
अब उनकी आँखों में वो बात कहाँ,
अब उनकी आँखों में वो बात कहाँ,
Shreedhar
सूर्य के ताप सी नित जले जिंदगी ।
सूर्य के ताप सी नित जले जिंदगी ।
Arvind trivedi
आँख खुलते ही हमे उसकी सख़्त ज़रूरत होती है
आँख खुलते ही हमे उसकी सख़्त ज़रूरत होती है
KAJAL NAGAR
एक छोरी काळती हमेशा जीव बाळती,
एक छोरी काळती हमेशा जीव बाळती,
प्रेमदास वसु सुरेखा
फेसबुक की बनिया–बुद्धि / मुसाफ़िर बैठा
फेसबुक की बनिया–बुद्धि / मुसाफ़िर बैठा
Dr MusafiR BaithA
आँखों में बगावत है ghazal by Vinit Singh Shayar
आँखों में बगावत है ghazal by Vinit Singh Shayar
Vinit kumar
संकल्प का अभाव
संकल्प का अभाव
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
भजलो राम राम राम सिया राम राम राम प्यारे राम
भजलो राम राम राम सिया राम राम राम प्यारे राम
Satyaveer vaishnav
समल चित् -समान है/प्रीतिरूपी मालिकी/ हिंद प्रीति-गान बन
समल चित् -समान है/प्रीतिरूपी मालिकी/ हिंद प्रीति-गान बन
Pt. Brajesh Kumar Nayak
भूख
भूख
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
#  कर्म श्रेष्ठ या धर्म  ??
# कर्म श्रेष्ठ या धर्म ??
Seema Verma
रंग में डूबने से भी नहीं चढ़ा रंग,
रंग में डूबने से भी नहीं चढ़ा रंग,
Buddha Prakash
" नई चढ़ाई चढ़ना है "
भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "
"इस हथेली को भी बस
*Author प्रणय प्रभात*
लगाव
लगाव
Arvina
एक तो धर्म की ओढनी
एक तो धर्म की ओढनी
Mahender Singh Manu
आपको डुबाने के लिए दुनियां में,
आपको डुबाने के लिए दुनियां में,
नेताम आर सी
जानती हूँ मैं की हर बार तुझे लौट कर आना है, पर बता कर जाया कर, तेरी फ़िक्र पर हमें भी अपना हक़ आजमाना है।
जानती हूँ मैं की हर बार तुझे लौट कर आना है, पर बता कर जाया कर, तेरी फ़िक्र पर हमें भी अपना हक़ आजमाना है।
Manisha Manjari
गीता मर्मज्ञ श्री दीनानाथ दिनेश जी
गीता मर्मज्ञ श्री दीनानाथ दिनेश जी
Ravi Prakash
हाँ ये सच है
हाँ ये सच है
Dr. Man Mohan Krishna
Loading...