Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 May 2024 · 1 min read

खिलेंगे फूल राहों में

खिलेंगे फूल राहों में
ज़रा दो कदम तो चल
बिछेंगे फूल राहों में
ज़रा दो कदम तो चल

कौन कहता है सुबह होगी नहीं
हौसलों को तू अपने
आसमां की उड़ान पर लेकर चल

रुकना नहीं है तुझको बीच राह में
मंजिल को अपने जिगर में बसा के चल

खुशबू से महकेगा आँचल
किसी को अपना बना के चल

किस्से जहां में यूं ही एहसास नहीं देते
किसी की राह के कांटे चुरा के चल

बेफिक्री में तू यूं ना जी
किसी के गम अपने जिगर में बसा के चल

तेरा नसीब बुलंदी पाए
दो फूल इंसानियत के खिला के चल

मुझे लोग खुदा का नूर कहें
दो वक़्त की नमाज़ अता कर के चल

खिलेंगे फूल राहों में
ज़रा दो कदम तो चल

बिछेंगे फूल राहों में
ज़रा दो कदम तो चल

अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

Language: Hindi
1 Like · 38 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
View all
You may also like:
" महक संदली "
भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "
आ रे बादल काले बादल
आ रे बादल काले बादल
goutam shaw
दुनिया के हर क्षेत्र में व्यक्ति जब समभाव एवं सहनशीलता से सा
दुनिया के हर क्षेत्र में व्यक्ति जब समभाव एवं सहनशीलता से सा
Raju Gajbhiye
“पसरल अछि अकर्मण्यता”
“पसरल अछि अकर्मण्यता”
DrLakshman Jha Parimal
नसीहत
नसीहत
Slok maurya "umang"
सभी फैसले अपने नहीं होते,
सभी फैसले अपने नहीं होते,
शेखर सिंह
इंटरनेट
इंटरनेट
Vedha Singh
नज़्म _ पिता आन है , शान है ।
नज़्म _ पिता आन है , शान है ।
Neelofar Khan
"बात सौ टके की"
Dr. Kishan tandon kranti
"लेखक होने के लिए हरामी होना जरूरी शर्त है।"
Dr MusafiR BaithA
वो आपको हमेशा अंधेरे में रखता है।
वो आपको हमेशा अंधेरे में रखता है।
Rj Anand Prajapati
इन चरागों का कोई मक़सद भी है
इन चरागों का कोई मक़सद भी है
Shweta Soni
कभी तो तुम्हे मेरी याद आयेगी
कभी तो तुम्हे मेरी याद आयेगी
Ram Krishan Rastogi
इंसान दुनिया जमाने से भले झूठ कहे
इंसान दुनिया जमाने से भले झूठ कहे
ruby kumari
मान तुम प्रतिमान तुम
मान तुम प्रतिमान तुम
Suryakant Dwivedi
समझ
समझ
अखिलेश 'अखिल'
ये दिल न जाने क्या चाहता है...
ये दिल न जाने क्या चाहता है...
parvez khan
"मोहे रंग दे"
Ekta chitrangini
प्रिय मैं अंजन नैन लगाऊँ।
प्रिय मैं अंजन नैन लगाऊँ।
Anil Mishra Prahari
राह कठिन है राम महल की,
राह कठिन है राम महल की,
Satish Srijan
एक सच ......
एक सच ......
sushil sarna
#सम_सामयिक
#सम_सामयिक
*प्रणय प्रभात*
*मारा हमने मूक कब, पशु जो होता मौन (कुंडलिया)*
*मारा हमने मूक कब, पशु जो होता मौन (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
बालगीत - सर्दी आई
बालगीत - सर्दी आई
Kanchan Khanna
हम फर्श पर गुमान करते,
हम फर्श पर गुमान करते,
Neeraj Agarwal
ये बता दे तू किधर जाएंगे।
ये बता दे तू किधर जाएंगे।
सत्य कुमार प्रेमी
आँख
आँख
विजय कुमार अग्रवाल
2872.*पूर्णिका*
2872.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
बचपन खो गया....
बचपन खो गया....
Ashish shukla
सवर्ण
सवर्ण
Dr. Pradeep Kumar Sharma
Loading...