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9 Jun 2024 · 1 min read

ख़्वाहिशें

” ख़्वाहिशें ”

भूलाने की बेइंतहा कोशिशें हुई हैं ।
खिलाफ़ मिरे कई साज़िशें हुई हैं ।।

बहुत रोया जब याद में दिल उनकी ।
मुझको सताने मुसलसल बारिशें हुई हैं ।।

मिरा इश्क़…… आज़माने की ख़ातिर ।
अब चाँद लाने की….. ख़्वाहिशें हुई हैं ।।

यूँ तो रोशन है हुस्न के रंगों से दुनिया ।
हमसफ़र उन्हें बनाने की फ़रमाइशें हुई हैं ।।

©डॉ. वासिफ़ काज़ी , इंदौर
©काज़ी की क़लम

28/3/2 , अहिल्या पल्टन, इक़बाल कॉलोनी
इंदौर, मप्र

1 Like · 21 Views
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