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19 Mar 2023 · 1 min read

💐प्रेम कौतुक-475💐

ख़्वाबों की दुनिया मुक्कमल होती,हाथ बढ़ाया ही कब,
मैं एतिबार लुटाता रहा,उन्होंने एतिबार जताया ही कब,
शर्म नहीं है उन्हें,हर बात में मिरे हिस्से में तोहमत दिया,
मैं भी कहूँगा दुनियावालों से,मेरा दिलबर आया ही कब।

©®अभिषेक: पाराशरः “आनन्द”

Language: Hindi
128 Views
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