Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
20 Feb 2023 · 1 min read

🌺प्रेम कौतुक-191🌺

क्या समझा है मेरे मुक़द्दस इश्क़ को?
कभी नहीं मिले फिर भी दिल मिले हैं।

©®अभिषेक:पाराशरः “आनन्द”

Language: Hindi
82 Views
Join our official announcements group on Whatsapp & get all the major updates from Sahityapedia directly on Whatsapp.
You may also like:
मुक्तक
मुक्तक
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
मत जला जिंदगी मजबूर हो जाऊंगा मैं ,
मत जला जिंदगी मजबूर हो जाऊंगा मैं ,
कवि दीपक बवेजा
लोरी (Lullaby)
लोरी (Lullaby)
Shekhar Chandra Mitra
अगर सक्सेज चाहते हो तो रुककर पीछे देखना छोड़ दो - दिनेश शुक्
अगर सक्सेज चाहते हो तो रुककर पीछे देखना छोड़ दो - दिनेश शुक्
dks.lhp
श्री राम राज्याभिषेक
श्री राम राज्याभिषेक
नवीन जोशी 'नवल'
अब कभी तुमको खत,हम नहीं लिखेंगे
अब कभी तुमको खत,हम नहीं लिखेंगे
gurudeenverma198
तुम लौट आओ ना
तुम लौट आओ ना
Anju ( Ojhal )
जीने की तमन्ना में
जीने की तमन्ना में
Satish Srijan
हँसी हम सजाएँ
हँसी हम सजाएँ
Dr. Sunita Singh
जमाने की अगर कह दूँ, जमाना रूठ जाएगा ।
जमाने की अगर कह दूँ, जमाना रूठ जाएगा ।
Ashok deep
*
*"शबरी"*
Shashi kala vyas
पर दारू तुम ना छोड़े
पर दारू तुम ना छोड़े
Mukesh Srivastava
नियति
नियति
Shyam Sundar Subramanian
सब अपने दुख में दुखी, किसे सुनाएँ हाल।
सब अपने दुख में दुखी, किसे सुनाएँ हाल।
डॉ.सीमा अग्रवाल
आँखों   पर   ऐनक   चढ़ा   है, और  बुद्धि  कुंद  है।
आँखों पर ऐनक चढ़ा है, और बुद्धि कुंद है।
संजीव शुक्ल 'सचिन'
आपके अन्तर मन की चेतना अक्सर जागृत हो , आपसे , आपके वास्तविक
आपके अन्तर मन की चेतना अक्सर जागृत हो , आपसे , आपके वास्तविक
Seema Verma
*अहंकार *
*अहंकार *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
पुस्तक समीक्षा-प्रेम कलश
पुस्तक समीक्षा-प्रेम कलश
राकेश चौरसिया
गलतियां सुधारी जा सकती है,
गलतियां सुधारी जा सकती है,
तरुण सिंह पवार
*प्रकृति का नव-वर्ष 【घनाक्षरी】*
*प्रकृति का नव-वर्ष 【घनाक्षरी】*
Ravi Prakash
नारी हूँ मैं
नारी हूँ मैं
Kavi praveen charan
आज की तारीख़ में
आज की तारीख़ में
*Author प्रणय प्रभात*
मन को कर देता हूँ मौसमो के साथ
मन को कर देता हूँ मौसमो के साथ
सुशील मिश्रा (क्षितिज राज)
बेटियाँ
बेटियाँ
Surinder blackpen
भ्रम
भ्रम
Kanchan Khanna
हे देश के जवानों !
हे देश के जवानों !
Buddha Prakash
इ इमली से
इ इमली से
Dr. Kishan tandon kranti
যখন হৃদয় জ্বলে, তখন প্রদীপ জ্বালানোর আর প্রয়োজন নেই, হৃদয়ে
যখন হৃদয় জ্বলে, তখন প্রদীপ জ্বালানোর আর প্রয়োজন নেই, হৃদয়ে
Sakhawat Jisan
इश्क़ का दस्तूर
इश्क़ का दस्तूर
VINOD KUMAR CHAUHAN
मुक्तक
मुक्तक
Er.Navaneet R Shandily
Loading...