Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 Jan 2024 · 2 min read

कैसा कोलाहल यह जारी है….?

कोलाहल-कोलाहल कैसा? कोलाहल यह जारी है….।
राम आएंगे कब कहाँ से कैसे, उनके आने की तैयारी है।।

अरे राम गए थे कहाँ जहां से, वापसी की लाचारी है।।
घट-घट वासी राम रमैया, मन मन्दिर में आसन धारी है।
बिलुप्त नहीं वो जिनका वापस, आना अबकी बारी है।।
कोलाहल-कोलाहल कैसा? कोलाहल यह जारी है….।

वो तो वापस तभी आ गए, मानस कृति ये कहता है।
राम राज करने हेतु ही, मेरा राम अयोध्या रहता है।।
यह मंदिर नया नहीं अपितु, बस हमने उसे संवारी है।
कोलाहल-कोलाहल कैसा? कोलाहल यह जारी है….।

एक आक्रांता दम्भ में भर कर, उनके मंदिर को तोड़ा।
समय काल में रहा लिखा, प्रभु ने न था मर्यादा छोड़ा।।
अबकी बार भी नया नही बस, जीर्णोद्धार सकारी है।
कोलाहल-कोलाहल कैसा? कोलाहल यह जारी है….।

प्राण प्रतिष्ठा हुआ था कब, और कब थे घर-घर दीप जले।
ज्ञात सभी को होगा यह फिर, कैसे ये नए विहिप पले।।
जिनके कंधे था उनको आना, उन्हीं कंधो पे सवारी है।
कोलाहल-कोलाहल कैसा? कोलाहल यह जारी है….।

माना कि एक घर टूटा था, थे टाट मड़ैया में वास किये।
तब के बिभीषण संग थे पर, अब वाले नहीं विश्वास कियें।।
वह भी प्रिय और यह भी प्रिय, प्रिय इनके तो जग सारी है।
कोलाहल-कोलाहल कैसा? कोलाहल यह जारी है….।

है विजय प्रतीक बना देखो, जो खोया था वह पाया है।
श्रेष्ठ सनातन धर्म की छवि, हम सबने मिलके बचाया है।।
अब भी हो मतभेद तो समझो, राम की सीख बिसारी है।।
कोलाहल-कोलाहल कैसा? कोलाहल यह जारी है….।

सबरी माता, केवट सा मित्र, और पाया प्रेम जो भाई का।
एक वनवासी वन-वन भटका, पर न भटकाया मन राई सा।।
जानो तो स्वयं के राम को जानों, जो जन-जन को प्यारी है।
कोलाहल-कोलाहल कैसा? कोलाहल यह जारी है….।

भेदभाव जो किये नहीं, वह अब अलगाव नहीं चाहेगा।
मन को निर्मल करो तभी तो, राम के मन को भी भाऐगा।।
राम के धुन में रहें झूमते, चढ़े नाम की ऐसी खुमारी है।।
कोलाहल-कोलाहल कैसा? कोलाहल यह जारी है….।

©® पांडेय चिदानंद “चिद्रूप”
(सर्वाधिकार सुरक्षित २१/०१/२०२४)

Language: Hindi
2 Likes · 99 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
"मीरा के प्रेम में विरह वेदना ऐसी थी"
Ekta chitrangini
नजरों को बचा लो जख्मों को छिपा लो,
नजरों को बचा लो जख्मों को छिपा लो,
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
जो समझदारी से जीता है, वह जीत होती है।
जो समझदारी से जीता है, वह जीत होती है।
Sidhartha Mishra
माँ का निश्छल प्यार
माँ का निश्छल प्यार
Soni Gupta
नमी आंखे....
नमी आंखे....
Naushaba Suriya
ओझल तारे हो रहे, अभी हो रही भोर।
ओझल तारे हो रहे, अभी हो रही भोर।
surenderpal vaidya
वैराग्य का भी अपना हीं मजा है,
वैराग्य का भी अपना हीं मजा है,
Manisha Manjari
शहर में नकाबधारी
शहर में नकाबधारी
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
कोई बात नहीं देर से आए,
कोई बात नहीं देर से आए,
Buddha Prakash
इश्क का इंसाफ़।
इश्क का इंसाफ़।
Taj Mohammad
साजिशें ही साजिशें...
साजिशें ही साजिशें...
डॉ.सीमा अग्रवाल
"What comes easy won't last,
पूर्वार्थ
■ ताज़ा शेर ■
■ ताज़ा शेर ■
*Author प्रणय प्रभात*
ग़ज़ल:- तेरे सम्मान की ख़ातिर ग़ज़ल कहना पड़ेगी अब...
ग़ज़ल:- तेरे सम्मान की ख़ातिर ग़ज़ल कहना पड़ेगी अब...
अरविन्द राजपूत 'कल्प'
ईश्वर अल्लाह गाड गुरु, अपने अपने राम
ईश्वर अल्लाह गाड गुरु, अपने अपने राम
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
अंतराष्टीय मजदूर दिवस
अंतराष्टीय मजदूर दिवस
Ram Krishan Rastogi
प्रेरणा गीत (सूरज सा होना मुश्किल पर......)
प्रेरणा गीत (सूरज सा होना मुश्किल पर......)
अनिल कुमार निश्छल
*मिले हमें गुरुदेव खुशी का, स्वर्णिम दिन कहलाया 【हिंदी गजल/ग
*मिले हमें गुरुदेव खुशी का, स्वर्णिम दिन कहलाया 【हिंदी गजल/ग
Ravi Prakash
💐अज्ञात के प्रति-50💐
💐अज्ञात के प्रति-50💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
दोहा- अभियान
दोहा- अभियान
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
पंचतत्व
पंचतत्व
लक्ष्मी सिंह
इंसानियत का वजूद
इंसानियत का वजूद
Shyam Sundar Subramanian
ज़िंदगी खुद ब खुद
ज़िंदगी खुद ब खुद
Dr fauzia Naseem shad
जनता के हिस्से सिर्फ हलाहल
जनता के हिस्से सिर्फ हलाहल
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
Even if you stand
Even if you stand
Dhriti Mishra
हर तरफ़ तन्हाइयों से लड़ रहे हैं लोग
हर तरफ़ तन्हाइयों से लड़ रहे हैं लोग
Shivkumar Bilagrami
बगुलों को भी मिल रहा,
बगुलों को भी मिल रहा,
sushil sarna
मूर्दों की बस्ती
मूर्दों की बस्ती
Shekhar Chandra Mitra
عيشُ عشرت کے مکاں
عيشُ عشرت کے مکاں
अरशद रसूल बदायूंनी
“ OUR NEW GENERATION IS OUR GUIDE”
“ OUR NEW GENERATION IS OUR GUIDE”
DrLakshman Jha Parimal
Loading...