Oct 12, 2016 · 1 min read

कविता :– तू चीख यहां आलाप ना कर !!

कविता :– तू चीख यहां आलाप ना कर !!

ठोकर लगी विलाप ना कर !
तू चीख यहां आलाप ना कर !!

नई डगर है , सत्य शपथ ले ,
अब तू चिंतन जाप ना कर !
बाँह फैलाए ,
राह खड़ी हैं ;
कदम रोक के पाप ना कर !!

भले सफर मुश्किल होगा ,
इन टेढ़ी-मेढ़ी राहों का !
दूर खड़ी ,
एक मंजिल होगी ;
पगडंडी की माप ना कर !!

आज जला दे तू अपने ,
अहंकार के रावण को !
लंका दहन ,
समझ ले उसको ;
खोने का पश्चाताप ना कर !!

दुराचार अपराधों में भी ,
सदा सत्य की विजय हुई है !
अन्तर्द्वन्द छेड़ ,
तू खुद से ;
दुर्जन सा क्रियाकलाप ना कर !!

कवि :– अनुज तिवारी “इन्दवार”

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