Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 Jun 2023 · 1 min read

कविता// घास के फूल

नदी कभी जी भर नहीं नहाई गई,
गहराई और मृत्यु के भय से।
जबकि, मृत्यु किनारे पर भी थी।
जमीन पर भी।
कितना समय लगता है, एक हृदयाघात में ?
लंबे समय तक यात्रा से बचते रहे लोग।
मजबूरी में कभी जवाई जहाज,
ट्रेन और बस में बैठते हुए हाथ जोड़े।
सुनाई दिया, सफ़र सलामत हो।
इंशा अल्लाह!
छींकने की आवाज के साथ
घरों में सुनाई दिया शतजीवी भव!
छींक में रुकती साँस के साथ रहा होगा मृत्यु का भय।
करवा, अहोई, छठ, तीज, बड़सैत सबमें,
जीवन की कामना के भीतर
बहुत गहरे छुपा है, मृत्यु का भय।
पाषाण काल से आधुनिक काल तक,
टोटकों और सत्ता को खुश करने के उपायों में
छुपी है मृत्यु, भय।
मृत्यु, बरगद की तरह होती है,
जिसके ठीक नीचे घास के फूलों से उगे होते हैं
जीवन के छोटे छोटे अंश।
जिसने बरगद देखा, धागे लपेटे, माथा टेका।
मृत्यु से समय माँगा।
जिसने फूल देखे, जमीन चूमी, गीत गाए
प्रेम किया।
उन्होंने जान लिया कि जीवन के बाद
और मृत्यु से बहुत पहले प्रेम रखा है, भय नहीं।
शिवा अवस्थी

2 Likes · 247 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
मुराद
मुराद
Mamta Singh Devaa
एक गुल्लक रख रखी है मैंने,अपने सिरहाने,बड़ी सी...
एक गुल्लक रख रखी है मैंने,अपने सिरहाने,बड़ी सी...
पूर्वार्थ
ज़रा-सी बात चुभ जाये,  तो नाते टूट जाते हैं
ज़रा-सी बात चुभ जाये, तो नाते टूट जाते हैं
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
मोह माया ये ज़िंदगी सब फ़ँस गए इसके जाल में !
मोह माया ये ज़िंदगी सब फ़ँस गए इसके जाल में !
Neelam Chaudhary
*चुनावी कुंडलिया*
*चुनावी कुंडलिया*
Ravi Prakash
धर्म या धन्धा ?
धर्म या धन्धा ?
SURYA PRAKASH SHARMA
आया बाढ नग पहाड़ पे🌷✍️
आया बाढ नग पहाड़ पे🌷✍️
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
हर लम्हा दास्ताँ नहीं होता ।
हर लम्हा दास्ताँ नहीं होता ।
sushil sarna
राम आए हैं भाई रे
राम आए हैं भाई रे
Harinarayan Tanha
चलो आज वक्त से कुछ फरियाद करते है....
चलो आज वक्त से कुछ फरियाद करते है....
रुचि शर्मा
Orange 🍊 cat
Orange 🍊 cat
Otteri Selvakumar
मोतियाबिंद
मोतियाबिंद
Surinder blackpen
हृदय के राम
हृदय के राम
इंजी. संजय श्रीवास्तव
बेकसूर तुम हो
बेकसूर तुम हो
SUNIL kumar
■ एक महीन सच्चाई।।
■ एक महीन सच्चाई।।
*प्रणय प्रभात*
बीजः एक असीम संभावना...
बीजः एक असीम संभावना...
डॉ.सीमा अग्रवाल
2524.पूर्णिका
2524.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
बचपन याद बहुत आता है
बचपन याद बहुत आता है
VINOD CHAUHAN
"चालाक आदमी की दास्तान"
Pushpraj Anant
दीप आशा के जलें
दीप आशा के जलें
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
अपना कोई वजूद हो, तो बताना मेरे दोस्त।
अपना कोई वजूद हो, तो बताना मेरे दोस्त।
Sanjay ' शून्य'
रक्षाबंधन
रक्षाबंधन
Santosh kumar Miri
Interest
Interest
Bidyadhar Mantry
तुम तो ठहरे परदेशी
तुम तो ठहरे परदेशी
विशाल शुक्ल
" सूरज "
Dr. Kishan tandon kranti
ये बिल्कुल मेरी मां जैसी ही है
ये बिल्कुल मेरी मां जैसी ही है
Shashi kala vyas
सोशल मीडिया
सोशल मीडिया
Raju Gajbhiye
विषय:- विजयी इतिहास हमारा।
विषय:- विजयी इतिहास हमारा।
Neelam Sharma
बात बनती हो जहाँ,  बात बनाए रखिए ।
बात बनती हो जहाँ, बात बनाए रखिए ।
Rajesh Tiwari
सीपी में रेत के भावुक कणों ने प्रवेश किया
सीपी में रेत के भावुक कणों ने प्रवेश किया
ruby kumari
Loading...