Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
20 Feb 2024 · 1 min read

कलम लिख दे।

कलम लिख दे,गीत गाए भारती।
आम-जन दौड़े -उतारे आरती।
दिव्यता देती मनुज को प्रीति कब?
जब निशा ज्ञानग्नि से जल हारती।

नर तभी यश-मान का शुभ भाल है।
सजगता के रुप की सुर-ताल है।
सीख सद्आलोक विकसित भानु-सम
चमक जाए, समझ विजयी माल है।

पं बृजेश कुमार नायक

98 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Pt. Brajesh Kumar Nayak
View all
You may also like:
महाश्रृंङ्गार_छंद_विधान _सउदाहरण
महाश्रृंङ्गार_छंद_विधान _सउदाहरण
Subhash Singhai
20-चेहरा हर सच बता नहीं देता
20-चेहरा हर सच बता नहीं देता
Ajay Kumar Vimal
वक्त से वकालत तक
वक्त से वकालत तक
Vishal babu (vishu)
उनका शौक़ हैं मोहब्बत के अल्फ़ाज़ पढ़ना !
उनका शौक़ हैं मोहब्बत के अल्फ़ाज़ पढ़ना !
शेखर सिंह
*मैं वर्तमान की नारी हूं।*
*मैं वर्तमान की नारी हूं।*
Dushyant Kumar
खुद के करीब
खुद के करीब
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
Life
Life
C.K. Soni
आज की नारी
आज की नारी
Shriyansh Gupta
कोशिश बहुत करता हूं कि दर्द ना छलके
कोशिश बहुत करता हूं कि दर्द ना छलके
इंजी. संजय श्रीवास्तव
याद मीरा को रही बस श्याम की
याद मीरा को रही बस श्याम की
Monika Arora
मूर्ख बनाने की ओर ।
मूर्ख बनाने की ओर ।
Buddha Prakash
पिछले पन्ने 4
पिछले पन्ने 4
Paras Nath Jha
2884.*पूर्णिका*
2884.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
मेरी कलम
मेरी कलम
अभिषेक पाण्डेय 'अभि ’
"अपने की पहचान "
Yogendra Chaturwedi
दिल को तेरी
दिल को तेरी
Dr fauzia Naseem shad
गैरों सी लगती है दुनिया
गैरों सी लगती है दुनिया
देवराज यादव
हिन्दी पर नाज है !
हिन्दी पर नाज है !
Om Prakash Nautiyal
चलती है जिन्दगी
चलती है जिन्दगी
डॉ. शिव लहरी
1 *मेरे दिल की जुबां, मेरी कलम से*
1 *मेरे दिल की जुबां, मेरी कलम से*
Dr Shweta sood
लोककवि रामचरन गुप्त के पूर्व में चीन-पाकिस्तान से भारत के हुए युद्ध के दौरान रचे गये युद्ध-गीत
लोककवि रामचरन गुप्त के पूर्व में चीन-पाकिस्तान से भारत के हुए युद्ध के दौरान रचे गये युद्ध-गीत
कवि रमेशराज
दूर देदो पास मत दो
दूर देदो पास मत दो
Ajad Mandori
बदलती हवाओं की परवाह ना कर रहगुजर
बदलती हवाओं की परवाह ना कर रहगुजर
VINOD CHAUHAN
यहां से वहां फिज़ाओं मे वही अक्स फैले हुए है,
यहां से वहां फिज़ाओं मे वही अक्स फैले हुए है,
manjula chauhan
#ग़ज़ल-
#ग़ज़ल-
*Author प्रणय प्रभात*
*रिवाज : आठ शेर*
*रिवाज : आठ शेर*
Ravi Prakash
होली
होली
नूरफातिमा खातून नूरी
समय के हाथ पर ...
समय के हाथ पर ...
sushil sarna
इन गज़लों का हुनर, तेरी आंखों की गुफ़्तुगू
इन गज़लों का हुनर, तेरी आंखों की गुफ़्तुगू
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
ख्वाबों में मेरे इस तरह आया न करो,
ख्वाबों में मेरे इस तरह आया न करो,
Ram Krishan Rastogi
Loading...