Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
20 Feb 2024 · 1 min read

कर्म -पथ से ना डिगे वह आर्य है।

सजग कर दे राष्ट्र को आचार्य है।
गुरु वही जो आत्मपथमय कार्य है।
रीढ़ वह ही लोक की बनता सदा।
कर्मपथ से ना डिगे वह आर्य है।

पं बृजेश कुमार नायक

98 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Pt. Brajesh Kumar Nayak
View all
You may also like:
हुस्न-ए-अदा
हुस्न-ए-अदा
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
Quote..
Quote..
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
फिजा में तैर रही है तुम्हारी ही खुशबू।
फिजा में तैर रही है तुम्हारी ही खुशबू।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
#विनम्र_शब्दांजलि
#विनम्र_शब्दांजलि
*Author प्रणय प्रभात*
बदन खुशबुओं से महकाना छोड़ दे
बदन खुशबुओं से महकाना छोड़ दे
कवि दीपक बवेजा
राम अवध के
राम अवध के
Sanjay ' शून्य'
ग़ज़ल _ मिरी #मैयत पे  रोने मे.....
ग़ज़ल _ मिरी #मैयत पे  रोने मे.....
शायर देव मेहरानियां
*.....उन्मुक्त जीवन......
*.....उन्मुक्त जीवन......
Naushaba Suriya
पुलवामा की याद (कुंडलिया)
पुलवामा की याद (कुंडलिया)
Ravi Prakash
बिन मांगे ही खुदा ने भरपूर दिया है
बिन मांगे ही खुदा ने भरपूर दिया है
हरवंश हृदय
माँ की यादें
माँ की यादें
मनोज कर्ण
शब्दों की रखवाली है
शब्दों की रखवाली है
Suryakant Dwivedi
तलाश हमें  मौके की नहीं मुलाकात की है
तलाश हमें मौके की नहीं मुलाकात की है
Tushar Singh
"जन्नत"
Dr. Kishan tandon kranti
मत बुझा मुहब्बत के दिए जलने दे
मत बुझा मुहब्बत के दिए जलने दे
shabina. Naaz
तुम क्या हो .....
तुम क्या हो ....." एक राजा "
Rohit yadav
जीवन है चलने का नाम
जीवन है चलने का नाम
Ram Krishan Rastogi
कुंती कान्हा से कहा,
कुंती कान्हा से कहा,
Satish Srijan
मछली रानी
मछली रानी
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
मंगलमय हो आपका विजय दशमी शुभ पर्व ,
मंगलमय हो आपका विजय दशमी शुभ पर्व ,
Neelam Sharma
कितना रोका था ख़ुद को
कितना रोका था ख़ुद को
हिमांशु Kulshrestha
इंसान क्यों ऐसे इतना जहरीला हो गया है
इंसान क्यों ऐसे इतना जहरीला हो गया है
gurudeenverma198
मुझे धरा पर न आने देना
मुझे धरा पर न आने देना
Gouri tiwari
किस कदर है व्याकुल
किस कदर है व्याकुल
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
" जलाओ प्रीत दीपक "
Chunnu Lal Gupta
दुआ
दुआ
Dr Parveen Thakur
रमेशराज की विरोधरस की मुक्तछंद कविताएँ—1.
रमेशराज की विरोधरस की मुक्तछंद कविताएँ—1.
कवि रमेशराज
जिस नारी ने जन्म दिया
जिस नारी ने जन्म दिया
VINOD CHAUHAN
बस एक गलती
बस एक गलती
Vishal babu (vishu)
सृष्टि का अंतिम सत्य प्रेम है
सृष्टि का अंतिम सत्य प्रेम है
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
Loading...