Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
30 Jul 2023 · 1 min read

*कभी जिंदगी अच्छी लगती, कभी मरण वरदान है (गीत)*

कभी जिंदगी अच्छी लगती, कभी मरण वरदान है (गीत)
—————————————-
कभी जिंदगी अच्छी लगती, कभी मरण वरदान है
1)
सुख जब तक भोगे काया ने, तब तक ही हर्षाती
स्वाद ले रही जिह्वा को, हर भोग-वस्तु है भाती
बूढ़ी-रोगी हुई देह को, ढोना क्या आसान है
2)
जब तक चलते हाथ-पैर, दुनियाभर पूरी घूमी
नगर-नगर वन पर्वत माटी, हर प्रदेश की चूमी
शिथिल पड़ा अब जब शरीर तो, शुभ लगता प्रस्थान है
3)
जीवन में उत्साह बताता, तन में कितना दम है
बुझा हुआ मन करे मुनादी, अब चलने का क्रम है
बिस्तर पर अधमरे पड़े से, हितकारी शमशान है
कभी जिंदगी अच्छी लगती, कभी मरण वरदान है
—————————————-
रचयिता : रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा, रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 99976 15451

Language: Hindi
294 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ravi Prakash
View all
You may also like:
कई वर्षों से ठीक से होली अब तक खेला नहीं हूं मैं /लवकुश यादव
कई वर्षों से ठीक से होली अब तक खेला नहीं हूं मैं /लवकुश यादव "अज़ल"
लवकुश यादव "अज़ल"
#छंद के लक्षण एवं प्रकार
#छंद के लक्षण एवं प्रकार
आर.एस. 'प्रीतम'
दोहा
दोहा
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
🌹लाफ्टर थेरेपी!हे हे हे हे यू लाफ्टर थेरेपी🌹
🌹लाफ्टर थेरेपी!हे हे हे हे यू लाफ्टर थेरेपी🌹
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
आदत न डाल
आदत न डाल
Dr fauzia Naseem shad
😢नारकीय जीवन😢
😢नारकीय जीवन😢
*Author प्रणय प्रभात*
🍂तेरी याद आए🍂
🍂तेरी याद आए🍂
Dr Manju Saini
तेवरी का सौन्दर्य-बोध +रमेशराज
तेवरी का सौन्दर्य-बोध +रमेशराज
कवि रमेशराज
बिना पंख फैलाये पंछी को दाना नहीं मिलता
बिना पंख फैलाये पंछी को दाना नहीं मिलता
Anil Mishra Prahari
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Jitendra Kumar Noor
खाली सूई का कोई मोल नहीं 🙏
खाली सूई का कोई मोल नहीं 🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
जो रास्ते हमें चलना सीखाते हैं.....
जो रास्ते हमें चलना सीखाते हैं.....
कवि दीपक बवेजा
आप सभी को रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं
आप सभी को रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं
लोकेश शर्मा 'अवस्थी'
जोशीला
जोशीला
RAKESH RAKESH
"पुतला"
Dr. Kishan tandon kranti
2768. *पूर्णिका*
2768. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
जीवन एक यथार्थ
जीवन एक यथार्थ
Shyam Sundar Subramanian
रंग पंचमी
रंग पंचमी
जगदीश लववंशी
ढलता सूरज गहराती लालिमा देती यही संदेश
ढलता सूरज गहराती लालिमा देती यही संदेश
Neerja Sharma
माँ भारती के वरदपुत्र: नरेन्द्र मोदी
माँ भारती के वरदपुत्र: नरेन्द्र मोदी
Dr. Upasana Pandey
गुफ्तगू
गुफ्तगू
Naushaba Suriya
हवाएँ मस्तियाँ लाईं, ये फागुन का महीना है【 हिंदी गजल/गीतिका
हवाएँ मस्तियाँ लाईं, ये फागुन का महीना है【 हिंदी गजल/गीतिका
Ravi Prakash
यह कैसी खामोशी है
यह कैसी खामोशी है
निरंजन कुमार तिलक 'अंकुर'
शब्द ब्रह्म अर्पित करूं
शब्द ब्रह्म अर्पित करूं
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
ये खुदा अगर तेरे कलम की स्याही खत्म हो गई है तो मेरा खून लेल
ये खुदा अगर तेरे कलम की स्याही खत्म हो गई है तो मेरा खून लेल
Ranjeet kumar patre
* जब लक्ष्य पर *
* जब लक्ष्य पर *
surenderpal vaidya
मूर्ख जनता-धूर्त सरकार
मूर्ख जनता-धूर्त सरकार
Shekhar Chandra Mitra
कविका मान
कविका मान
Dr. Sunita Singh
मुक्तक
मुक्तक
महेश चन्द्र त्रिपाठी
धड़कन धड़कन ( गीत )
धड़कन धड़कन ( गीत )
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
Loading...