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27 Dec 2022 · 1 min read

कब तक

अब तेराऔर इंतज़ार कब तक।
दिल को रखूं बेकरार कब तक।

अच्छा लगता है तन्हा रहना
मगर तन्हाई से प्यार कब तक।

जिंदा रहने है तो सांसें चाहिए
सांसों का ये व्यापार कब तक।

बहक गया है मन ,तेरे इश्क़ में
अब ये एख्तियार कब तक।

उलझे रिश्ते,अब सुलझाएं कैसे
सुलझने से होंगे तार तार कब तक।

सुरिंदर कौर

Language: Hindi
156 Views
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