Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
8 Sep 2016 · 1 min read

ओ मंजिल के मुसाफिर

एक मित्र को जन्म दिन पर प्रोत्साहित करती एक रचना ।
आप भी अपने मित्र को ये पैगाम दे सकते हैं ।

ओ मंजिल के मुसाफिर
चलते रहना सुबह और शाम
मेरा बताना और तेरा सुनना
कभी ने रुकने पाये , तेरे हाथों से शुभ काम
वक़्त बदले सदिया बदले , तूने नहीं बदलने अपने उसूल
ले जा बुलन्दियों पर देश को , देती कसम तुझे ये मिट्टी की धूल
ना रुकना और ना ही थकना
विचारों से ही लड़ना है
लिखकर खूब कलम चलाकर
ऐसे ही आगे बढ़ना है
नित नित पढ़ना , आगे बढ़ना
इस ऊर्जा के आह्वान को
और भी लेजा आगे तू
मेरे देश महान को
आने वाली पीढ़ियों को तूने
समझाकर जाना है
लिखकर कलम से अपनी
राज जिंदगी के बतलाना है
कर तेज़ धार कलम की अब तू
होजा लक्ष्य पर सवार
आज हुआ तेरा जन्म नया
यही करना हर वर्ष विचार
अच्छे को कर नित प्रोत्साहित
बुरे को दे शर्म से मार
तेरे आचरण से सब बदले
ऐसा कर कलम का वार
पुरानी बीती भूल जाना
आगे है तूने बस बढ़ते जाना
सरल शब्दों में दी तुम्हे ऊर्जा
बस यही राग तुमने नित पढ़ते जाना

बस यही राग तुमने नित पढ़ते जाना ।।

Language: Hindi
577 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from कृष्ण मलिक अम्बाला
View all
You may also like:
* मुस्कुराते नहीं *
* मुस्कुराते नहीं *
surenderpal vaidya
जरुरी नहीं कि
जरुरी नहीं कि
Sangeeta Beniwal
"अश्क भरे नयना"
Ekta chitrangini
शंगोल
शंगोल
Bodhisatva kastooriya
Wishing you a Diwali filled with love, laughter, and the swe
Wishing you a Diwali filled with love, laughter, and the swe
Lohit Tamta
मर्यादा और राम
मर्यादा और राम
Dr Parveen Thakur
नर से नर पिशाच की यात्रा
नर से नर पिशाच की यात्रा
Sanjay ' शून्य'
दो अक्षर में कैसे बतला दूँ
दो अक्षर में कैसे बतला दूँ
Harminder Kaur
"मछली और भालू"
Dr. Kishan tandon kranti
होली
होली
Manu Vashistha
कस्ती धीरे-धीरे चल रही है
कस्ती धीरे-धीरे चल रही है
कवि दीपक बवेजा
The blue sky !
The blue sky !
Buddha Prakash
पर्यावरण
पर्यावरण
नवीन जोशी 'नवल'
मन की पीड़ा
मन की पीड़ा
पूर्वार्थ
दोहा
दोहा
Dr. Sunita Singh
भगवान ने कहा-“हम नहीं मनुष्य के कर्म बोलेंगे“
भगवान ने कहा-“हम नहीं मनुष्य के कर्म बोलेंगे“
कवि रमेशराज
दोहा
दोहा
sushil sarna
💐प्रेम कौतुक-324💐
💐प्रेम कौतुक-324💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
निगाहें के खेल में
निगाहें के खेल में
Surinder blackpen
*** लम्हा.....!!! ***
*** लम्हा.....!!! ***
VEDANTA PATEL
जनता के हिस्से सिर्फ हलाहल
जनता के हिस्से सिर्फ हलाहल
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
"तुम्हारी चाहतों ने ख़्वाब छीने, नींद तक छीनीं,
*Author प्रणय प्रभात*
करवा चौथ@)
करवा चौथ@)
Vindhya Prakash Mishra
तुम हमेशा से  मेरा आईना हो॥
तुम हमेशा से मेरा आईना हो॥
कुमार
दिल की दवा चाहिए
दिल की दवा चाहिए
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
अब तो ख़िलाफ़े ज़ुल्म ज़ुबाँ खोलिये मियाँ
अब तो ख़िलाफ़े ज़ुल्म ज़ुबाँ खोलिये मियाँ
Sarfaraz Ahmed Aasee
विनाश नहीं करती जिन्दगी की सकारात्मकता
विनाश नहीं करती जिन्दगी की सकारात्मकता
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
वक़्त का इतिहास
वक़्त का इतिहास
Shekhar Chandra Mitra
महाशिव रात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ
महाशिव रात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ
अंकित शर्मा 'इषुप्रिय'
*करते हैं प्रभु भक्त पर, निज उपकार अनंत (कुंडलिया)*
*करते हैं प्रभु भक्त पर, निज उपकार अनंत (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
Loading...