Oct 11, 2016 · 1 min read

ऐे ज़िंदगी

ऐे ज़िंदगी मुझे तुझसे मोहब्बत क्युँ है,
तू हसती है मेरे जख्मों पर ,
फिर मुझे तेरी आदत क्युँ है |
गिरना भी तूने सिखाया,
उठना भी तूने सिखाया,
फिर तुझे मेरी जरुरत क्युँ है ||
कुछ तो दिलचस्बी है,
मेरी सांसो में तुझे,
आखिर मुझसे इतनी चाहत क्युँ है |
गिर कर भी मैंने,
सीखा है हसना ज़िंदगी से,
आज ज़िंदगी ही मेरी इबादत क्युँ है ||
ज़िंदगी को समझना है तो,
चलना सीखो रुकना नहीं,
चलते मुसाफिरों को ये
मंजिल से मिलाती है |
सिर्फ जीना ज़िंदगी नहीं,
ज़िंदगी तो वो है,
जो औरो के काम आती है ||

– सोनिका मिश्रा

1 Like · 3 Comments · 374 Views
You may also like:
आज की पत्रकारिता
Anamika Singh
नीति के दोहे
Rakesh Pathak Kathara
सूरज काका
Dr Archana Gupta
तुम हो
Alok Saxena
बिछड़न [भाग २]
Anamika Singh
पुरी के समुद्र तट पर (1)
Shailendra Aseem
सारे निशां मिटा देते हैं।
Taj Mohammad
मौन में गूंजते शब्द
Manisha Manjari
हिन्दुस्तान की पहचान(मुक्तक)
Prabhudayal Raniwal
हवस
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
ग़ज़ल
सुरेखा कादियान 'सृजना'
मेरे पिता है प्यारे पिता
Vishnu Prasad 'panchotiya'
फिर से खो गया है।
Taj Mohammad
धूप कड़ी कर दी
सिद्धार्थ गोरखपुरी
क्या कोई मुझे भी बताएगा
Krishan Singh
सुबह आंख लग गई
Ashwani Kumar Jaiswal
प्रेम की राह पर -8
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
यही है भीम की महिमा
Jatashankar Prajapati
*~* वक्त़ गया हे राम *~*
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
पढ़ाई-लिखाई एक बोझ
AMRESH KUMAR VERMA
वेदना जब विरह की...
अश्क चिरैयाकोटी
बुलंद सोच
Dr. Alpa H.
भगवान हमारे पापा हैं
Lucky Rajesh
टूटता तारा
Anamika Singh
डरिये, मगर किनसे....?
मनोज कर्ण
पापा जी
सत्येन्द्र पटेल ‘प्रखर’
नित हारती सरलता है।
Saraswati Bajpai
पिता के चरणों को नमन ।
Buddha Prakash
💐नव ऊर्जा संचार💐
DR ARUN KUMAR SHASTRI
मिला है जब से साथ तुम्हारा
Ram Krishan Rastogi
Loading...