Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
18 Dec 2022 · 1 min read

एक पंछी

एक पंछी पिंजरे के इस पार आना चाहता है!
वो भी तो एक खुला आसमान पाना चाहता है!

चाहता है वो भी उन्मुक्त गगन की हद देखना!
साथ ही वो चाहता है अपना भी कद देखना!

सोचता है इन परों में जान बाकी है कि नहीं!
उड़ने का कोई भी अरमान बाकी है कि नहीं!

लेकिन बेजुबान ये देखो बहुत लाचार है!
मनुष्य का पंछियों से कैसा ये व्यवहार है!

कब तलक होते रहेंगे जुल्म इन पर बोलिये!
चुप से क्या हासिल है कोई तो अब मूहँ खोलिये!!

3 Likes · 305 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
खेत का सांड
खेत का सांड
आनन्द मिश्र
अतीत
अतीत
Bodhisatva kastooriya
वर्तमान सरकारों ने पुरातन ,
वर्तमान सरकारों ने पुरातन ,
ओनिका सेतिया 'अनु '
घाव करे गंभीर
घाव करे गंभीर
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
#drarunkumarshastri
#drarunkumarshastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
"आँगन की तुलसी"
Ekta chitrangini
बाबूजी
बाबूजी
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
अंग प्रदर्शन करने वाले जितने भी कलाकार है उनके चरित्र का अस्
अंग प्रदर्शन करने वाले जितने भी कलाकार है उनके चरित्र का अस्
Rj Anand Prajapati
बुद्धि सबके पास है, चालाकी करनी है या
बुद्धि सबके पास है, चालाकी करनी है या
Shubham Pandey (S P)
एकतरफा सारे दुश्मन माफ किये जाऐं
एकतरफा सारे दुश्मन माफ किये जाऐं
Maroof aalam
To my old self,
To my old self,
पूर्वार्थ
तुम्हें नहीं पता, तुम कितनों के जान हो…
तुम्हें नहीं पता, तुम कितनों के जान हो…
Anand Kumar
"ताले चाबी सा रखो,
सत्येन्द्र पटेल ‘प्रखर’
हरा-भरा अब कब रहा, पेड़ों से संसार(कुंडलिया )
हरा-भरा अब कब रहा, पेड़ों से संसार(कुंडलिया )
Ravi Prakash
"जिन्दादिली"
Dr. Kishan tandon kranti
हृदय कुंज  में अवतरित, हुई पिया की याद।
हृदय कुंज में अवतरित, हुई पिया की याद।
sushil sarna
ईश्वर, कौआ और आदमी के कान
ईश्वर, कौआ और आदमी के कान
Dr MusafiR BaithA
मातु काल रात्रि
मातु काल रात्रि
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
विश्वास
विश्वास
Dr. Pradeep Kumar Sharma
*प्यार या एहसान*
*प्यार या एहसान*
Harminder Kaur
कवित्व प्रतिभा के आप क्यों ना धनी हों ,पर आप में यदि व्यावहा
कवित्व प्रतिभा के आप क्यों ना धनी हों ,पर आप में यदि व्यावहा
DrLakshman Jha Parimal
कह कोई ग़ज़ल
कह कोई ग़ज़ल
Shekhar Chandra Mitra
सच तो फूल होते हैं।
सच तो फूल होते हैं।
Neeraj Agarwal
नारी के हर रूप को
नारी के हर रूप को
Dr fauzia Naseem shad
बेटियां
बेटियां
Mukesh Kumar Sonkar
**तुझे ख़ुशी..मुझे गम **
**तुझे ख़ुशी..मुझे गम **
गायक - लेखक अजीत कुमार तलवार
हर वक़्त तुम्हारी कमी सताती है
हर वक़्त तुम्हारी कमी सताती है
shabina. Naaz
बेजुबाँ सा है इश्क़ मेरा,
बेजुबाँ सा है इश्क़ मेरा,
शेखर सिंह
परत दर परत
परत दर परत
Juhi Grover
ग़ज़ल _ आज उनको बुलाने से क्या फ़ायदा।
ग़ज़ल _ आज उनको बुलाने से क्या फ़ायदा।
Neelofar Khan
Loading...