Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame

एक नया विचार

मित्रों एक नया विचार आपको सौंप रहा हूँ :-
**********************************
खाली हाथ आये थे
जायेंगे भी खाली हाथ
सोचो इसे तो
परम सत्य है ये बात।

पर मेरा ये
विश्वास है अटूट
कि ये बात भी
है बिलकुल झूठ।

ना खाली हाथ
आते है हम
ना खाली हाथ
जाते है हम।

सोचो जब हम
इस दुनिया में आये
तो कहाँ हम
कोई हाथ लाये ।

ये हाथ ये शरीर
और ये आकार
ये इस दुनिया से ही
तो लिया है उधार।

ये मिटटी ये हवा
ये आग ये पानी
इसमें कुछ भी
नही है आसमानी।

ये सब तो मिला
है यहाँ संसार में
जिससे बना है शरीर
सब है उधार में ।

और जब यहाँ से
सब जायेंगे
वो उधार का हिस्सा
वापस दे जायेंगे।

हम तो आये थे
अमूर्त रूप में
और जायेंगे भी
उसी अमूर्त रूप में ।

और साथ ले जायेंगे
अपने कर्म केवल
और छोड़ जायेंगे
उनकी गंध केवल।
************************
सप्रेम -शैलेन्द्र
लखनऊ

167 Views
You may also like:
अवधी की आधुनिक प्रबंध धारा: हिंदी का अद्भुत संदोह
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
सोंच समझ....
Dr. Alpa H. Amin
He is " Lord " of every things
Ram Ishwar Bharati
जिंदगी: एक संघर्ष
Aditya Prakash
अपने मंजिल को पाऊँगा मैं
Utsav Kumar Aarya
तरसती रहोगी एक झलक पाने को
N.ksahu0007@writer
काश....! तू मौन ही रहता....
Dr. Pratibha Mahi
सहारा
अरशद रसूल /Arshad Rasool
रावण - विभीषण संवाद (मेरी कल्पना)
Anamika Singh
.✍️वो थे इसीलिये हम है...✍️
"अशांत" शेखर
कुछ बारिशें बंजर लेकर आती हैं।
Manisha Manjari
शायरी ने बर्बाद कर दिया |
Dheerendra Panchal
✍️मैं जब पी लेता हूँ✍️
"अशांत" शेखर
आशाओं के दीप.....
Chandra Prakash Patel
ये कैसा बेटी बाप का रिश्ता है?
Taj Mohammad
✍️बस इतनी सी ख्वाईश✍️
"अशांत" शेखर
कलम
Dr Meenu Poonia
कभी ज़मीन कभी आसमान.....
अश्क चिरैयाकोटी
क्लासिफ़ाइड
सिद्धार्थ गोरखपुरी
मां क्यों निष्ठुर?
Saraswati Bajpai
साहब का कुत्ता (हास्य व्यंग्य कहानी)
दुष्यन्त 'बाबा'
दिल पूछता है हर तरफ ये खामोशी क्यों है
VINOD KUMAR CHAUHAN
**अशुद्ध अछूत - नारी **
DR ARUN KUMAR SHASTRI
सच्चाई का मार्ग
AMRESH KUMAR VERMA
पिता !
Kuldeep mishra (KD)
"एक यार था मेरा"
Lohit Tamta
बदनाम होकर।
Taj Mohammad
राहतें ना थी।
Taj Mohammad
मोहब्बत में।
Taj Mohammad
स्वर कोकिला लता
RAFI ARUN GAUTAM
Loading...