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2 Jul 2016 · 1 min read

एक ऐसा था इंसान

वो दुनियाँ के गम ले रहा था
बाँट रहा था खुशियोँ के पल
वो हंस रहा था गम ले के
पथ से हटा रहा था काँटा
और बिछा रहे थे सुमन
एक ऐसा था इंसान ……

वो दिखा रहा था
भटके लोगो को पथ
मिटा रहे थे अँधेरा-पन
उनका इरादा बड़ा नेक था
जोड़ रहे थे टुटा बंधन
एक ऐसा था इंसान ……

प्रेम करते थे हर प्राणी को
वो न करता था
खुद पे कभी अभिमान
दीन दुखियों की सेवा को
वो समझता था मान-सम्मान
एक ऐसा था इंसान ……

कहते थे !
उसे जमीं का भगवान
पर वो कहता था
मै हूँ सधारण इंसान
जो बुराई को मिटाता था
सत्य से करता था प्रेम
वो बाँटता-फिरता था ज्ञान
एक ऐसा था इंसान …

Language: Hindi
345 Views
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