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15 Jun 2023 · 1 min read

एक अकेला

एक

कालोनी के

गुमनाम होते

उजाड़ बगीचे के

भीतर और भीतर

संकरी पगडंडी पर

चलकर

वो झुका ही रहता है ।

लापरवाही का

दंश झेल रहे

इस बगीचे में

रात अधरात

फेंक दिये गये कचरे को

किसी

कीमती मोती की

तरह बीनता जाता है ।

कि अचानक वाइल्ड फोटोग्राफी करने

वालों की आवाज

से गूंजते हैं उसके कान ।

ओह, देखो ,

हवाओं की तीरंदाजी ,

ये सूरज की चूनर

लपेट ली है उस दरख्त ने

वो चिड़िया ने

ओस का आचमन किसा

ये सुनो ,

ये तितली के पंख

कोई सुर छेड़ गये।

यह ,

सुनकर, वो भय से कांप गया ।

लगा जैसे कि यह कोई

भूतिया जगह है ।

उसके भाव आपस मे गड्डमगड्ड होने लगे ।

वो सूरज पूरा खिलने से पहले

वहां से भाग गया ।

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