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11 Nov 2022 · 1 min read

जरूरत उसे भी थी

देखा पलट के उसने भी
हसरत उसे भी थी ॥

हम जिसपे मिट रहे थे
चाहत उसे भी थी ॥

चुप हो गयी देख कर वो भी इधर उधर
दुनिया से मेरी तरह शिकायत उसे भी थी ॥

और ये सोच के अंधेरे को गले से लगा लिया हमने
लेकिन रातों में जागने की आदत उसे भी थी ॥

एक दिन रो पड़ी वो मुझे परेशान देखकर
उस दिन पता चला क़ि मेरी ज़रूरत उसे भी थी ॥

अभिषेक पाण्डेय अभि
११/११/२२

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