Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
30 Sep 2022 · 1 min read

उपहार

भगवान की भक्ति उपहार है।
धर्म रुपी चरित्र उपहार है।
प्यार का स्वरुप उपहार है।
दोस्त की मित्रता उपहार है।
अज्ञानी को ज्ञान उपहार है।
सत्य को न्याय उपहार है।
रोगी को सेहत उपहार है।
गरीबी को ताकत उपहार है।
राजा को धर्म उपहार है।
मनुष्य को संस्कार उपहार है।
पशू – पक्षी को आजादी उपहार है।
बच्चे को अच्छी शिक्षा उपहार है।
युवा को लक्ष्य प्राप्त करना उपहार है।
देश को वीर की वीरता उपहार है।

उपहार तो संस्कार और मेहनत से ही मिलती है।
ये उपहार कोई खरीद नही सकता,
सत्कर्म से ये उपहार हासिल होता है।

जि. विजय कुमार
हैदराबाद, तेलंगाना

Language: Hindi
1 Like · 272 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
कद्र जिनकी अब नहीं वो भी हीरा थे कभी
कद्र जिनकी अब नहीं वो भी हीरा थे कभी
Mahesh Tiwari 'Ayan'
हल्की हल्की सी हंसी ,साफ इशारा भी नहीं!
हल्की हल्की सी हंसी ,साफ इशारा भी नहीं!
Vishal babu (vishu)
भाषा और बोली में वहीं अंतर है जितना कि समन्दर और तालाब में ह
भाषा और बोली में वहीं अंतर है जितना कि समन्दर और तालाब में ह
Rj Anand Prajapati
जिंदगी में एक रात ऐसे भी आएगी जिसका कभी सुबह नहीं होगा ll
जिंदगी में एक रात ऐसे भी आएगी जिसका कभी सुबह नहीं होगा ll
Ranjeet kumar patre
लोकतंत्र में शक्ति
लोकतंत्र में शक्ति
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
तड़के जब आँखें खुलीं, उपजा एक विचार।
तड़के जब आँखें खुलीं, उपजा एक विचार।
डॉ.सीमा अग्रवाल
"अगर हो वक़्त अच्छा तो सभी अपने हुआ करते
आर.एस. 'प्रीतम'
बर्फ के टीलों से घर बनाने निकले हैं,
बर्फ के टीलों से घर बनाने निकले हैं,
कवि दीपक बवेजा
दूर रह कर सीखा, नजदीकियां क्या है।
दूर रह कर सीखा, नजदीकियां क्या है।
Surinder blackpen
माँ तुम्हारे रूप से
माँ तुम्हारे रूप से
Dr. Rajendra Singh 'Rahi'
दीवारें ऊँचीं हुईं, आँगन पर वीरान ।
दीवारें ऊँचीं हुईं, आँगन पर वीरान ।
Arvind trivedi
जेल जाने का संकट टले,
जेल जाने का संकट टले,
*Author प्रणय प्रभात*
तुम्हीं पे जमी थीं, ये क़ातिल निगाहें
तुम्हीं पे जमी थीं, ये क़ातिल निगाहें
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
" वो क़ैद के ज़माने "
Chunnu Lal Gupta
आँखों के आंसू झूठे है, निश्छल हृदय से नहीं झरते है।
आँखों के आंसू झूठे है, निश्छल हृदय से नहीं झरते है।
Buddha Prakash
ज़िंदगी को अगर स्मूथली चलाना हो तो चु...या...पा में संलिप्त
ज़िंदगी को अगर स्मूथली चलाना हो तो चु...या...पा में संलिप्त
Dr MusafiR BaithA
दो जीवन
दो जीवन
Rituraj shivem verma
"इश्क़ वर्दी से"
Lohit Tamta
बदली - बदली हवा और ये जहाँ बदला
बदली - बदली हवा और ये जहाँ बदला
सिद्धार्थ गोरखपुरी
अपनी समस्या का समाधान_
अपनी समस्या का समाधान_
Rajesh vyas
होली : नौ दोहे
होली : नौ दोहे
Ravi Prakash
कुदरत का प्यारा सा तोहफा ये सारी दुनियां अपनी है।
कुदरत का प्यारा सा तोहफा ये सारी दुनियां अपनी है।
सत्य कुमार प्रेमी
माँ...की यादें...।
माँ...की यादें...।
Awadhesh Kumar Singh
दिल की बात,
दिल की बात,
Pooja srijan
जो हमारे ना हुए कैसे तुम्हारे होंगे।
जो हमारे ना हुए कैसे तुम्हारे होंगे।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
ग़ज़ल/नज़्म - शाम का ये आसमांँ आज कुछ धुंधलाया है
ग़ज़ल/नज़्म - शाम का ये आसमांँ आज कुछ धुंधलाया है
अनिल कुमार
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
वक्त
वक्त
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
खुद को पाने में
खुद को पाने में
Dr fauzia Naseem shad
** जिंदगी  मे नहीं शिकायत है **
** जिंदगी मे नहीं शिकायत है **
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
Loading...