Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
17 Jun 2016 · 1 min read

इन्द्र मेघ भेज दो

बड़ा प्रचण्ड ताप अंश में इसे न माप दीन का हुआ विलाप क्योंकि देह थी जली हुई
न पुष्प ही खिला न वृक्षपत्र ही हिला न काल में दया दिखी विनष्ट टूट के कली हुई
असीम वेदना विदग्ध मेदिनी सुना रही प्रतीत हो रही कि मर्त्य मूंग सी दली हुई
सुनो मही पुकारती पुकारते समस्त जीव इन्द्र मेघ भेज दो न ग्रीष्म ये भली हुई
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ

Language: Hindi
461 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
शासन हो तो ऐसा
शासन हो तो ऐसा
जय लगन कुमार हैप्पी
दृढ़ निश्चय
दृढ़ निश्चय
विजय कुमार अग्रवाल
संपूर्ण राममय हुआ देश मन हर्षित भाव विभोर हुआ।
संपूर्ण राममय हुआ देश मन हर्षित भाव विभोर हुआ।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
हनुमान जयंती
हनुमान जयंती
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
क्या बचा  है अब बदहवास जिंदगी के लिए
क्या बचा है अब बदहवास जिंदगी के लिए
सिद्धार्थ गोरखपुरी
जब ये मेहसूस हो, दुख समझने वाला कोई है, दुख का भर  स्वत कम ह
जब ये मेहसूस हो, दुख समझने वाला कोई है, दुख का भर स्वत कम ह
पूर्वार्थ
Dr Arun Kumar Shastri
Dr Arun Kumar Shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
Suni padi thi , dil ki galiya
Suni padi thi , dil ki galiya
Sakshi Tripathi
"मकर संक्रान्ति"
Dr. Kishan tandon kranti
जिस्मानी इश्क
जिस्मानी इश्क
Sanjay ' शून्य'
कुदरत है बड़ी कारसाज
कुदरत है बड़ी कारसाज
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
कोरोना महामारी
कोरोना महामारी
अभिषेक पाण्डेय 'अभि ’
*मुक्तक*
*मुक्तक*
LOVE KUMAR 'PRANAY'
दिल का खेल
दिल का खेल
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
ये आंखों से बहती अश्रुधरा ,
ये आंखों से बहती अश्रुधरा ,
ज्योति
मेघ
मेघ
Rakesh Rastogi
एकदम सुलझे मेरे सुविचार..✍️🫡💯
एकदम सुलझे मेरे सुविचार..✍️🫡💯
Ms.Ankit Halke jha
बदलने को तो इन आंखों ने मंजर ही बदल डाले
बदलने को तो इन आंखों ने मंजर ही बदल डाले
हरवंश हृदय
सहसा यूं अचानक आंधियां उठती तो हैं अविरत,
सहसा यूं अचानक आंधियां उठती तो हैं अविरत,
Abhishek Soni
"अतितॄष्णा न कर्तव्या तॄष्णां नैव परित्यजेत्।
Mukul Koushik
हे! नव युवको !
हे! नव युवको !
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
गुरु तेगबहादुर की शहादत का साक्षी है शीशगंज गुरुद्वारा
गुरु तेगबहादुर की शहादत का साक्षी है शीशगंज गुरुद्वारा
कवि रमेशराज
*दादाजी (बाल कविता)*
*दादाजी (बाल कविता)*
Ravi Prakash
घर-घर तिरंगा
घर-घर तिरंगा
Jeewan Singh 'जीवनसवारो'
कौन सुने फरियाद
कौन सुने फरियाद
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
जो कुछ भी है आज है,
जो कुछ भी है आज है,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
गुरु मेरा मान अभिमान है
गुरु मेरा मान अभिमान है
Harminder Kaur
पत्नी रुष्ट है
पत्नी रुष्ट है
Satish Srijan
प्राण प्रतिष्ठा
प्राण प्रतिष्ठा
Mahender Singh
मूर्दों का देश
मूर्दों का देश
Shekhar Chandra Mitra
Loading...