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22 Dec 2022 · 1 min read

इतनी निराशा किस लिए

अभी तो शुरू हुआ है सफर
ये ज़ोर आजमाइश किस लिए
धीरे धीरे चलते रहिए मंजिल की तरफ
है इतनी निराशा किस लिए

उग रहा है अंकुर अभी
वक्त लगेगा बनने में पेड़ इसको
मिलेंगे एक दिन फल भी तुम्हें
है इतनी निराशा किस लिए

हो रहा अभी तो सूर्योदय
छटा अरुणोदय की बिखर रही
होगा सामना बादलों से अभी तो
है इतनी निराशा किस लिए

कोई मंत्र नहीं है सफलता का
संघर्ष के सिवाय यहां पर
अभी तो शुरू हुआ है ये सफ़र
है इतनी निराशा किस लिए

सफलता भी मिलेगी कभी
कभी नहीं भी मिल पाएगी
ये ज़रूरी नहीं दोस्तों ज़िंदगी हमेशा
मनमाफिक परिणाम ही लाएगी
फिर है इतनी निराशा किस लिए

चलना पड़ेगा कभी अकेले भी
कारवां की फिक्र किस लिए
जीत जायेगा होगा इरादा अगर अडिग
है इतनी निराशा किस लिए

लेकिन है जो साथ तेरे हमेशा
उन्हें कभी तू भूलना नहीं
सोचते हैं जो तेरे भले के लिए
उनसे ये नाराज़गी किस लिए।

Language: Hindi
14 Likes · 4 Comments · 675 Views

Books from सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'

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