Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Aug 2016 · 1 min read

आपसे हूँ गुलजार

आपसे हूँ अब गुलजार खुदा जाने क्यों
हर बुरे वक्त तू आधार खुदा जाने क्यों

: पास वो आकर बातें जब करता मीठी
है बढी धड़कन रफ्तार खुदा जाने क्यों

साथ मेरे बन छाया चलता वो हर पल
हो गया जीवन सार खुदा जाने क्यों

कट रहे है दिन अवसाद भरे क्यों मेरे
आज महका फिर परिवार खुदा जानें क्यों

हो गयी कोन खता जो हमसे है तू खफा
फूल ही ये हुए अंगार खुदा जाने क्यों

प्रीत की रीत निभा वो बन जाते मेरे
मन गया ही अब त्यौहार खुदा जाने क्यों

सोचती ही रहती मैं मिलने आऊँगी
काम का है बस अम्बार खुदा जाने क्यो

खूब करती मनमानी अपनी तो मैं यूँ
इसिये प्यार भरी फटकार खुदा जाने क्यों

लाड़ मेरे अन्दर था निकला वो वाहर
हो गयी है दिल की हार खुदा जाने क्यों

70 Likes · 335 Views
You may also like:
✍️बदल गए है ✍️
Vaishnavi Gupta (Vaishu)
सबको दुनियां और मंजिल से मिलाता है पिता।
सत्य कुमार प्रेमी
वो महक उठे ---------------
लक्ष्मण 'बिजनौरी'
जाने क्यों वो सहमी सी ?
Saraswati Bajpai
जुल्फ जब खुलकर बिखर गई
मनमोहन लाल गुप्ता 'अंजुम'
राख
लक्ष्मी सिंह
रूसवा है मुझसे जिंदगी
VINOD KUMAR CHAUHAN
फासले
Seema 'Tu hai na'
मेरे लबों की दुआ
Dr fauzia Naseem shad
एक से नहीं होते
shabina. Naaz
तुमसे इस तरह नफरत होने लगी
gurudeenverma198
सावन में एक नारी की अभिलाषा
Ram Krishan Rastogi
*मेरी इच्छा*
Dushyant Kumar
आर या पार (छोटी कहानी)
Ravi Prakash
ज़िंदगी अपने सफर की मंजिल चाहती है।
Taj Mohammad
चलना ही पड़ेगा
Mahendra Narayan
अंतिमदर्शन
विनोद सिन्हा "सुदामा"
अनवरत सी चलती जिंदगी और भागते हमारे कदम।
Manisha Manjari
✍️यूँही मैं क्यूँ हारता नहीं✍️
'अशांत' शेखर
जाति- पाति, भेद- भाव
AMRESH KUMAR VERMA
सच
Vikas Sharma'Shivaaya'
उलझनें_जिन्दगी की
मनोज कर्ण
छोटे गाँव का लड़का था मैं
D.k Math { ਧਨੇਸ਼ }
🚩अमर काव्य हर हृदय को, दे सद्ज्ञान-प्रकाश
Pt. Brajesh Kumar Nayak
श्यामपट
Buddha Prakash
मां का घर
Yogi B
भगतसिंह
Shekhar Chandra Mitra
पिता और एफडी
सूर्यकांत द्विवेदी
जीवन संगीत
Shyam Sundar Subramanian
नदी का किनारा
Ashwani Kumar Jaiswal
Loading...