Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
12 Feb 2024 · 1 min read

आज की बेटियां

आज की बेटियों में हैं कुछ इस तरह
जो माता-पिता का मान-सम्मान बढ़ाती हैं
और कुछ ऐसी बेटियाँ भी हैं
जो माता-पिता का मान-सम्मान घटाती हैं
जीवन में उत्तम कार्य करके अपना नाम कमाती हैं
और कुछ निकृष्ट काम करके नाम डुबाती हैं
ओम कहे मात पिता से बेटियों को अच्छे संस्कार दीजिए
बेटियों से भी है कहना सुसंस्कारित बनिए

ओमप्रकाश भारती ओम्
बालाघाट

Language: Hindi
54 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from ओमप्रकाश भारती *ओम्*
View all
You may also like:
जिंदगी की उड़ान
जिंदगी की उड़ान
Kanchan verma
Ranjeet Shukla
Ranjeet Shukla
Ranjeet Kumar Shukla
जब भी बुलाओ बेझिझक है चली आती।
जब भी बुलाओ बेझिझक है चली आती।
Ahtesham Ahmad
जीवन के गीत
जीवन के गीत
Harish Chandra Pande
सौ बार मरता है
सौ बार मरता है
sushil sarna
निराला का मुक्त छंद
निराला का मुक्त छंद
Shweta Soni
बगल में कुर्सी और सामने चाय का प्याला
बगल में कुर्सी और सामने चाय का प्याला
VINOD CHAUHAN
1-	“जब सांझ ढले तुम आती हो “
1- “जब सांझ ढले तुम आती हो “
Dilip Kumar
जमाना नहीं शराफ़त का (सामायिक कविता)
जमाना नहीं शराफ़त का (सामायिक कविता)
Dr. Kishan Karigar
तू मुझको संभालेगी क्या जिंदगी
तू मुझको संभालेगी क्या जिंदगी
कृष्णकांत गुर्जर
अभी कुछ बरस बीते
अभी कुछ बरस बीते
shabina. Naaz
2939.*पूर्णिका*
2939.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
दाग
दाग
Neeraj Agarwal
भीगी फिर थीं भारी रतियाॅं!
भीगी फिर थीं भारी रतियाॅं!
Rashmi Sanjay
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
खुदा की हर बात सही
खुदा की हर बात सही
Harminder Kaur
"खामोशी"
Dr. Kishan tandon kranti
ये दिल है जो तुम्हारा
ये दिल है जो तुम्हारा
Ram Krishan Rastogi
हो भविष्य में जो होना हो, डर की डर से क्यूं ही डरूं मैं।
हो भविष्य में जो होना हो, डर की डर से क्यूं ही डरूं मैं।
Sanjay ' शून्य'
बस अणु भर मैं बस एक अणु भर
बस अणु भर मैं बस एक अणु भर
Atul "Krishn"
मैं चाहती हूँ
मैं चाहती हूँ
ruby kumari
चंद्र प्रकाश द्वय:ः मधुर यादें
चंद्र प्रकाश द्वय:ः मधुर यादें
Ravi Prakash
नई शुरावत नई कहानियां बन जाएगी
नई शुरावत नई कहानियां बन जाएगी
पूर्वार्थ
कुछ राज़ बताए थे अपनों को
कुछ राज़ बताए थे अपनों को
Rekha khichi
तुझसे कुछ नहीं चाहिये ए जिन्दगीं
तुझसे कुछ नहीं चाहिये ए जिन्दगीं
Jay Dewangan
😢हे माँ माताजी😢
😢हे माँ माताजी😢
*प्रणय प्रभात*
स्त्रीलिंग...एक ख़ूबसूरत एहसास
स्त्रीलिंग...एक ख़ूबसूरत एहसास
Mamta Singh Devaa
आदत न डाल
आदत न डाल
Dr fauzia Naseem shad
एक छोटी सी आश मेरे....!
एक छोटी सी आश मेरे....!
VEDANTA PATEL
तन पर हल्की  सी धुल लग जाए,
तन पर हल्की सी धुल लग जाए,
Shutisha Rajput
Loading...