May 9, 2017 · 1 min read

सद् गणतंत्र सु दिवस मनाएं

सद् गणतंत्र सु दिवस मनाएं |
जीवन में अनुपम प्रकाश के रंग भरे, उल्लास सजाएं

राष्ट्र हमारा कल गुलाम था
आज स्वयं हम ही गुलाम है।
अवनति- हिंसामय रोगों से,
एंठू है, हम सिर्फ चाम है ।
सोई आत्मा, आँसू गम के,
निकल रहे, कुछ तो शर्माएं।
सद् गणतंत्र सुदिवस मनाएं ।

कहीं लूट,इज्जत औ धन की।
बन बैठे हम हिंसक -सनकी।
जीवित हैं, गह अहंकार को,
चिंता नाहीं इनको जन की ।
स्वयं सुधरिए ,जग सुधरेगा,
नारे को कुछ तो अपनाएं।
सद् गणतंत्र सु दिवस मनाएं।

जय-जय, केवल है भाषा में ।
मन ,दूरी की परिभाषा में ।
अंतःकरण मिले ना भैया ।
बुद्धि, प्रेम की अभिलाषा में,
बैठी ,यह अज्ञान तिमिर है ।
दिल-सुबोल को कर्म बनाएंं।
सद् गणतंत्र सु दिवस मनाएं।

———‐-‐——–‐———

पं बृजेश कुमार नायक

●उक्त रचना को साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से प्रकाशित मेरी कृति “पं बृजेश कुमार नायक की चुनिंदा रचनाए” के द्वितीय संस्करण के अनुसार परिष्कृत किया गया है।

●”पं बृजेश कुमार नायक की चुनिंदा रचनाए” काव्य संग्रह का द्वितीय संस्करण अमेजोन और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है।

???????????

1 Like · 1 Comment · 752 Views
You may also like:
कुछ दिन की है बात ,सभी जन घर में रह...
Pt. Brajesh Kumar Nayak
राम राज्य
Shriyansh Gupta
हे ईश्वर!
Anamika Singh
युद्ध सिर्फ प्रश्न खड़ा करता है [भाग४]
Anamika Singh
काँटे .. ज़ख्म बेहिसाब दे गये
Princu Thakur "usha"
वक्त अब कलुआ के घर का ठौर है
Pt. Brajesh Kumar Nayak
"क़तरा"
Ajit Kumar "Karn"
आंखों में तुम मेरी सांसों में तुम हो
VINOD KUMAR CHAUHAN
अमर कोंच-इतिहास
Pt. Brajesh Kumar Nayak
खुद को तुम पहचानो नारी [भाग २]
Anamika Singh
*श्री हुल्लड़ मुरादाबादी 【कुंडलिया】*
Ravi Prakash
झरने और कवि का वार्तालाप
Ram Krishan Rastogi
हे ! धरती गगन केऽ स्वामी...
मनोज कर्ण
पिता का प्रेम
Seema gupta ( bloger) Gupta
सागर
Vikas Sharma'Shivaaya'
पनघट और मरघट में अन्तर
Ram Krishan Rastogi
माँ — फ़ातिमा एक अनाथ बच्ची
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
विषय:सूर्योपासना
Vikas Sharma'Shivaaya'
जिंदगी की कुछ सच्ची तस्वीरें
Ram Krishan Rastogi
बांस का चावल
सिद्धार्थ गोरखपुरी
*मेरे देश का सैनिक*
Prabhudayal Raniwal
The Buddha And His Path
Buddha Prakash
A wise man 'The Ambedkar'
Buddha Prakash
हिन्दी थिएटर के प्रमुख हस्ताक्षर श्री पंकज एस. दयाल जी...
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
शर्म-ओ-हया
Dr. Alpa H.
बनकर कोयल काग
Jatashankar Prajapati
राष्ट्रवाद का रंग
मनोज कर्ण
अभी बचपन है इनका
gurudeenverma198
पिता
Dr. Kishan Karigar
आज कुछ ऐसा लिखो
Saraswati Bajpai
Loading...