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22 Jan 2023 · 1 min read

आंसुओं के समंदर

लोग यूँ कमज़ोर हमको कह गए
ज़ुल्म सारे हम खुशी से सह गए

मुँह चिढ़ाने में लगा था जब फ़रेब
लब मिरे ख़ामोश होकर रह गए

इक ज़रा इनकार हमसे क्या हुआ
नेकियों के ढेर सारे ढह गए

आस भी जन्नत की बाक़ी रह गई
सब ख़ज़ाने भी यहीं पर रह गए

एक हिचकी ग़म ही ऐसा दे गई
आंसुओं के फिर समंदर बह गए

फिर तड़पती रह गई ताबीर भी
ख़्वाब आंखों में अधूरे रह गए

ज़िंदगी पूरी हुई अरशद रसूल
आपके बस कारनामे रह गए

1 Like · 303 Views
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