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1 Feb 2024 · 1 min read

अश्रु से भरी आंँखें

अश्रु से भरी आंँखें

ख़ामोशी से देखतीं,
अश्रु से भरीं आंँखें ।
न जानें कितनी अनकही बातों को-
-बयां करतीं ये आंँखें।
ख़ामोशी से सब कुछ सह जातीं, होठों पर मुस्कान लिए।
आंँखें बस तन्हाई में छलकती-
-हर ज़ख्म को हल्का करती-
-यह आंँखें निःस्वार्थ प्रेम को,
बिना बोलें बयां करतीं।

डॉ माधवी मिश्रा ‘शुचि’

Tag: Poem
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