Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
8 Feb 2022 · 2 min read

अलविदा: नहीं रहे महाभारत के भीम

अभी एक गम खत्म नहीं हुआ था की एक और गम सामने आ चुका है। लता मंगेशकर के निधन होने का मातम अभी खत्म भी नहीं हुआ था की फेमस सीरियल ‘महाभारत’ में ‘भीम’ की भूमिका निभाने वाले प्रवीण कुमार सोबती (Praveen Kumar Sobti) का निधन हो गया है। वह काफी समय से बीमार चल रहे थे। प्रवीण कुमार सोबती ने 74 साल की उम्र में अंतिम सांस ली है। पंजाब से ताल्लुक रखने वाले प्रवीण ने बॉलीवुड की कई फिल्मों में अपनी अदाकारी से फैंस का दिल जीत लिया था।

‘महाभारत’ में भीम के किरदार में प्रवीण कुमार सोबती (Praveen Kumar Sobti) को खूब पसंद किया गया था। लंबे-चौड़े प्रवीण कुमार सोबती ने अपनी एक्टिंग से भीम के किरदार में जान फूंक दी थी। इस सीरियल से उन्हें बहुत पॉपुलैरिटी मिली।

प्रवीण कुमार महाभारत सीरियल के अलावा कई बॉलीवुड फिल्मों में भी अपनी दमदार एक्टिंग से फैंस को इंप्रेस कर चुके हैं. लेकिन महाभारत सीरियल में भीम का किरदार निभाकर वो घर-घर में फेमस हो गए. उन्हें भीम के किरदार में काफी ज्यादा पसंद किया गया था.

ओलंपिक खेलों में भी लिया था हिस्सा:-
प्रवीण को उनकी शानदार कदकाठी के लिए भी जाना जाता था। पंजाब के रहने वाले प्रवीण 6 फीट लंबे थे। एक्टिंग में आने से पहले प्रवीण स्पोर्ट्स में भी काफी एक्टिव थे। वे एक हैमर और डिस्कस थ्रो एथलीट थे। प्रवीण ने एशियाई और कॉमनवेल्थ गेम्स में कई मेडल्स जीते थे। हांगकांग में आयोजित एशियाई खेल में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता था। उन्होंने ओलंपिक में दो बार देश का प्रतिनिधित्व भी किया था।
एक्टिंग में आने से पहले प्रवीण एक हैमर और डिस्कस थ्रो एथलीट थे।वह एशियाई खेलों में 2 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य जीत चुके थे।उन्होंने एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल हासिल करके देश का नाम रोशन किया था। उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। खेल की दुनिया में नाम कमाने के बाद उन्हें सीमा सुरक्षा बल (BSF) की नौकरी भी मिली थी लेकिन कुछ साल बाद प्रवीण कुमार सोबती ने एक्टिंग करने का मन बनाया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

प्रवीण कुमार महाभारत सीरियल के अलावा कई बॉलीवुड फिल्मों में भी अपनी दमदार एक्टिंग से फैंस को इंप्रेस कर चुके हैं। लेकिन महाभारत सीरियल में भीम का किरदार निभाकर वो घर-घर में फेमस हो गए। उन्हें भीम के किरदार में काफी ज्यादा पसंद किया गया था।प्रवीण के निधन की खबर से उनके फैंस के दिल टूट गए हैं।

Language: Hindi
2 Likes · 300 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
जमाना नहीं शराफ़त का (सामायिक कविता)
जमाना नहीं शराफ़त का (सामायिक कविता)
Dr. Kishan Karigar
जां से बढ़कर है आन भारत की
जां से बढ़कर है आन भारत की
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
कैसे कह दूं पंडित हूँ
कैसे कह दूं पंडित हूँ
Satish Srijan
आईना प्यार का क्यों देखते हो
आईना प्यार का क्यों देखते हो
Vivek Pandey
मन
मन
Happy sunshine Soni
लाइफ का कोई रिमोट नहीं होता
लाइफ का कोई रिमोट नहीं होता
शेखर सिंह
इत्तिफ़ाक़न मिला नहीं होता।
इत्तिफ़ाक़न मिला नहीं होता।
सत्य कुमार प्रेमी
समय के हाथ पर ...
समय के हाथ पर ...
sushil sarna
ज़रूरी है...!!!!
ज़रूरी है...!!!!
Jyoti Khari
I am always in search of the
I am always in search of the "why",
Manisha Manjari
सत्य क्या है ?
सत्य क्या है ?
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
" दूरियां"
Pushpraj Anant
महानिशां कि ममतामयी माँ
महानिशां कि ममतामयी माँ
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
बैठे-बैठे यूहीं ख्याल आ गया,
बैठे-बैठे यूहीं ख्याल आ गया,
Sonam Pundir
कवि का दिल बंजारा है
कवि का दिल बंजारा है
नूरफातिमा खातून नूरी
*तेरे इंतज़ार में*
*तेरे इंतज़ार में*
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
■ आप आए, बहार आई ■
■ आप आए, बहार आई ■
*Author प्रणय प्रभात*
"तलाशिए"
Dr. Kishan tandon kranti
शांत मन को
शांत मन को
Dr fauzia Naseem shad
3350.⚘ *पूर्णिका* ⚘
3350.⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
शीर्षक - संगीत
शीर्षक - संगीत
Neeraj Agarwal
गुरु अमरदास के रुमाल का कमाल
गुरु अमरदास के रुमाल का कमाल
कवि रमेशराज
कन्हैया आओ भादों में (भक्ति गीतिका)
कन्हैया आओ भादों में (भक्ति गीतिका)
Ravi Prakash
शतरंज
शतरंज
भवेश
दुखों का भार
दुखों का भार
Pt. Brajesh Kumar Nayak
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
उम्र बढती रही दोस्त कम होते रहे।
उम्र बढती रही दोस्त कम होते रहे।
Sonu sugandh
I find solace in silence, though it's accompanied by sadness
I find solace in silence, though it's accompanied by sadness
पूर्वार्थ
जीवन को पैगाम समझना पड़ता है
जीवन को पैगाम समझना पड़ता है
कवि दीपक बवेजा
गांव की ख्वाइश है शहर हो जानें की और जो गांव हो चुके हैं शहर
गांव की ख्वाइश है शहर हो जानें की और जो गांव हो चुके हैं शहर
Soniya Goswami
Loading...