Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
25 Jun 2023 · 2 min read

अरर मरर के झोपरा / MUSAFIR BAITHA

बचपन की बारिश का यादों में दखल
अब भी जीवन में बचा बसा है इतना
कि भीग जाता है जब तब
उसकी गुदगुदी से सारा तनमन

मेरे समय के नंग धड़ंग बचपन में
बारिश का भीगा मौसम
गांव भर के कमउमरिया या कि
मेरे हमउमरिया बच्चों के लिए
बेहिसाब मस्ती का उपादान बन आता था

उन दिनों टाट मिट्टी और फूस के ही
घर थे अमूमन सबके और
फूस व खपरैल की बनी होती थी छप्पर
गहरी तिरछी ढालों वाली
छप्परों की ओरियानी से फिसल कर
जो मोटी तेज जलधार बहती थी छलछल धड़धड़
उसके नीचे आ बच्चों का नहाना आपादमस्तक
मौजों के नभ को छू लेना बन जाता था जैसे

छुटपन की उस गंवई मस्ती पर
टोक टाक या पहरा भी नहीं होता था कोई
ऐसा निर्बंध आवारा मेघ आस्वाद पाना
उन नागरी बच्चों को कहां नसीब
जिनके बचपन के प्रकृतिभाव को
हिदायतों औ’ मनाहियों की बारिश ही
सोख लेती है काफी हद तक
और कुछ बूंद बारिश से भी संग करने को
ललचता मचलता रह जाता है शहरी बचपन

हमारे बचपन में हमारी गंवई माएं भी
होती थीं हर मां की तरह फिक्रजदा जरूर
मगर हम बच्चों के भीगने पर नहीं
बल्कि तब
जब कई कई दिनों तक
लगातार होती आतंक में तब्दील हो गई बारिश
थमने थकने का नहीं लेती थी नाम

मां की चिन्ता भी तब
चावल के उफनाए अधहन की तरह
बेहद सघन और प्रबल हो आती थी
जब घर का छप्पर बीसियों जगह से रिसने लगता
और सिर छिपाने को बित्ता भर जगह भी
नहीं बचती घर के किसी कोने अन्तरे में

जर जलावन चूल्हे तक की
ऐसी भीगा पटाखा सेहत हो जाती
कि हमारे घर भर की सुलगती जठराग्नि को
बुझाने की इनकी खुद की ज्वलन शक्ति ही
स्थगित हो जाती

मां मेरे जैसा महज खुदयकीनी नहीं थी
दुख एवं सुख की हिसाबदारी में
ऊपरवाले का हाथ होने में
भरठेहुन विश्वास था उनका भी
हर परसोचसेवी इंसान की तरह

बेलगाम आंधी पानी से
बरसती इस आफत की बेला में
मां भी जलदेवता का गुहार लगाती-
अरर मरर के झोपरा
अब न बरसा दम धरा
हे गोसाईं इन्नर देबता
तू बचाबा हम्मरा

और भी न जाने क्या क्या बदहवास
गंवई देसी जुबान में बुदबुदाती
इस आई बला को टालने का
कोई और टोटका भी करती जाती

हम बच्चे बड़े कौतूहल और आशा संचरित निगाहों से
मां के इन संकट निरोधक उपचारों के
बल और फलाफल का
रोमांच आकुल हो बेकल इंतजार करने लगते

तब मुझे कहां मालूम था कि
मौसमविज्ञानी की भविष्यबयानी और
कथित वर्षा देवता की कृपा अकृपा
दोनों ही साबित हो सकते हैं अंततः
सिर्फ मनभरम और छलावा

बारिश से अब भी है साबका
पर बचपन की बारिश में
केवल भीगता था उमगता मन
अबके होती बारिश में
भीगता है अंतर्मन भी
मथती जब बारिश की बाढ़ ।

-भादो 2008

【9 साल बाद दुबारा पोस्ट कर रहा हूँ】

Language: Hindi
1 Like · 162 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr MusafiR BaithA
View all
You may also like:
बात जुबां से अब कौन निकाले
बात जुबां से अब कौन निकाले
Sandeep Pande
सत्ता की हवस वाले राजनीतिक दलों को हराकर मुद्दों पर समाज को जिताना होगा
सत्ता की हवस वाले राजनीतिक दलों को हराकर मुद्दों पर समाज को जिताना होगा
ऐ./सी.राकेश देवडे़ बिरसावादी
दर जो आली-मकाम होता है
दर जो आली-मकाम होता है
Anis Shah
तुम-सम बड़ा फिर कौन जब, तुमको लगे जग खाक है?
तुम-सम बड़ा फिर कौन जब, तुमको लगे जग खाक है?
Pt. Brajesh Kumar Nayak
कसूर किसका
कसूर किसका
Swami Ganganiya
दिखा तू अपना जलवा
दिखा तू अपना जलवा
gurudeenverma198
"गुलशन"
Dr. Kishan tandon kranti
रिश्ते से बाहर निकले हैं - संदीप ठाकुर
रिश्ते से बाहर निकले हैं - संदीप ठाकुर
Sandeep Thakur
सरपरस्त
सरपरस्त
पाण्डेय चिदानन्द "चिद्रूप"
समझौता
समझौता
Shyam Sundar Subramanian
कुछ भी रहता नहीं है
कुछ भी रहता नहीं है
Dr fauzia Naseem shad
Ranjeet Shukla
Ranjeet Shukla
Ranjeet Kumar Shukla
2580.पूर्णिका
2580.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
इंसान एक दूसरे को परखने में इतने व्यस्त थे
इंसान एक दूसरे को परखने में इतने व्यस्त थे
ruby kumari
अंजान बनकर चल दिए
अंजान बनकर चल दिए
VINOD CHAUHAN
कातिल
कातिल
Gurdeep Saggu
हर मंदिर में दीप जलेगा
हर मंदिर में दीप जलेगा
Ansh
रिश्तों की सिलाई अगर भावनाओ से हुई हो
रिश्तों की सिलाई अगर भावनाओ से हुई हो
शेखर सिंह
ग़ज़ल _ शबनमी अश्क़ 💦💦
ग़ज़ल _ शबनमी अश्क़ 💦💦
Neelofar Khan
#मुक्तक-
#मुक्तक-
*प्रणय प्रभात*
विश्वकप-2023 टॉप स्टोरी
विश्वकप-2023 टॉप स्टोरी
World Cup-2023 Top story (विश्वकप-2023, भारत)
दानवीरता की मिशाल : नगरमाता बिन्नीबाई सोनकर
दानवीरता की मिशाल : नगरमाता बिन्नीबाई सोनकर
Dr. Pradeep Kumar Sharma
राक्षसी कृत्य - दीपक नीलपदम्
राक्षसी कृत्य - दीपक नीलपदम्
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
"Always and Forever."
Manisha Manjari
*राममय हुई रामपुर रजा लाइब्रेरी*
*राममय हुई रामपुर रजा लाइब्रेरी*
Ravi Prakash
पाया तो तुझे, बूंद सा भी नहीं..
पाया तो तुझे, बूंद सा भी नहीं..
Vishal babu (vishu)
कभी खुश भी हो जाते हैं हम
कभी खुश भी हो जाते हैं हम
Shweta Soni
**प्यार भरा पैगाम लिखूँ मैं **
**प्यार भरा पैगाम लिखूँ मैं **
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
याद अमानत बन गयी, लफ्ज़  हुए  लाचार ।
याद अमानत बन गयी, लफ्ज़ हुए लाचार ।
sushil sarna
समय ही तो हमारी जिंदगी हैं
समय ही तो हमारी जिंदगी हैं
Neeraj Agarwal
Loading...