Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
25 Jul 2016 · 1 min read

अधूरी

अधूरी बातें
हमारी हर मर्तबा
बातें आधे में छुट जाती है ।
कभी तुम चुप हो जाते हो
कभी मैं पहले खामोश हो जाता हूँ
कैद होने लगते है खामोशी में
फिर तुम कहकहने लगती हो
और तोड़ देती हो इस सन्नाटे को
फिर गुप्तगु होने लगती है मौषम की
दादी के गुटने के दर्द की
दादा जी के हाजमे से लेकर
रिस्तेदारो की सियासत की
पर हमारी बात वही छुट जाती है
हर बार ये सोचता हूँ की मैं भरूँगा
इस रिक्त जगह को ख़ामोशी को मैं तोड़ूंगा
पर हर दफा तुम्हारी हंसी बाजि मार ले जाती है । नहीं समझ पाता हूँ तुम ये सन्नाटा तोड़ती हो या हमारे रिश्ते को टूटने से बचाती हो
तुम चाहती हो हमारी बात पूरी भी हो कभी या यूँ ही अधर में लटकी रहे ताकि चलता रहे ये सफ़र यूँ ही

Language: Hindi
1 Comment · 586 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
उसकी जरूरत तक मैं उसकी ज़रुरत बनी रहीं !
उसकी जरूरत तक मैं उसकी ज़रुरत बनी रहीं !
Dr Manju Saini
*डॉ अरुण कुमार शास्त्री*
*डॉ अरुण कुमार शास्त्री*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
जाने कब दुनियां के वासी चैन से रह पाएंगे।
जाने कब दुनियां के वासी चैन से रह पाएंगे।
सत्य कुमार प्रेमी
💐अज्ञात के प्रति-145💐
💐अज्ञात के प्रति-145💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
3121.*पूर्णिका*
3121.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
राख के ढेर की गर्मी
राख के ढेर की गर्मी
Atul "Krishn"
सुबह की पहल तुमसे ही
सुबह की पहल तुमसे ही
Rachana Jha
हिन्दी दिवस
हिन्दी दिवस
SHAMA PARVEEN
दूसरों की आलोचना
दूसरों की आलोचना
Dr.Rashmi Mishra
पग बढ़ाते चलो
पग बढ़ाते चलो
surenderpal vaidya
घणो ललचावे मन थारो,मारी तितरड़ी(हाड़ौती भाषा)/राजस्थानी)
घणो ललचावे मन थारो,मारी तितरड़ी(हाड़ौती भाषा)/राजस्थानी)
gurudeenverma198
पहाड़ की सोच हम रखते हैं।
पहाड़ की सोच हम रखते हैं।
Neeraj Agarwal
!! पलकें भीगो रहा हूँ !!
!! पलकें भीगो रहा हूँ !!
Chunnu Lal Gupta
अयोध्या धाम तुम्हारा तुमको पुकारे
अयोध्या धाम तुम्हारा तुमको पुकारे
Harminder Kaur
जगन्नाथ रथ यात्रा
जगन्नाथ रथ यात्रा
Pooja Singh
तन्हा
तन्हा
अमित मिश्र
■ सांकेतिक कविता
■ सांकेतिक कविता
*Author प्रणय प्रभात*
साथ
साथ
Dr fauzia Naseem shad
कभी कभी चाहती हूँ
कभी कभी चाहती हूँ
ruby kumari
*सुबह टहलना (बाल कविता)*
*सुबह टहलना (बाल कविता)*
Ravi Prakash
अहंकार और अधंकार दोनों तब बहुत गहरा हो जाता है जब प्राकृतिक
अहंकार और अधंकार दोनों तब बहुत गहरा हो जाता है जब प्राकृतिक
Rj Anand Prajapati
बाल कविता: भालू की सगाई
बाल कविता: भालू की सगाई
Rajesh Kumar Arjun
उसकी सूरत देखकर दिन निकले तो कोई बात हो
उसकी सूरत देखकर दिन निकले तो कोई बात हो
Dr. Shailendra Kumar Gupta
दूसरों को समझने से बेहतर है खुद को समझना । फिर दूसरों को समझ
दूसरों को समझने से बेहतर है खुद को समझना । फिर दूसरों को समझ
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
पुनर्वास
पुनर्वास
Dr. Pradeep Kumar Sharma
मूकनायक
मूकनायक
मनोज कर्ण
22, *इन्सान बदल रहा*
22, *इन्सान बदल रहा*
Dr Shweta sood
तू होती तो
तू होती तो
Satish Srijan
“तड़कता -फड़कता AMC CENTRE LUCKNOW का रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम” (संस्मरण 1973)
“तड़कता -फड़कता AMC CENTRE LUCKNOW का रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम” (संस्मरण 1973)
DrLakshman Jha Parimal
गीत
गीत
Shiva Awasthi
Loading...