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1 Nov 2023 · 1 min read

“Radiance of Purity”

On the horizon, the Sun’s ascent, a baby newly born,
Her father wept, pledging love and protection, from night to morn.
For ages, he’d prayed to a divine goddess, high above,
His prayers heard, graced by her presence, pure as a dove.
The tiny eyes sang of purity and grace,
An essence of a woman offering a warm embrace.
When her tiny lips curled into a precious smile,
All hearts overflowed with love, if only for a while.
Nothing appeared as pure as her aura’s radiant light,
A soul so untainted, aglow with divine might.

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