सैलीब्रिटी,झूठे विज्ञापन और दुष्प्रचार का समाधान दर्शनशास्त्र के पास (Philosophy has the solution to celebrities, false advertisements and propaganda)

छोटे व्यक्ति छोटी गलती करते हैं तो बड़े व्यक्ति बडी गलती करते हैं। ये छोटे और बड़े व्यक्ति कौन होते हैं? छोटे व्यक्तियों की गलतियों के इतने बड़े नुकसान नहीं होते हैं , जबकि बड़े व्यक्तियों की गलतियों से पूरी मानवता प्रभावित होती है।छोटा कहां जाने वाला व्यक्ति तो बड़े व्यक्तियों की गलतियों का सिर्फ शिकार होता है। यह कहना ग़लत नहीं होगा कि शताब्दियों से मानवता बड़े व्यक्तियों की गलतियों का खामियाजा भुगत रही है। राजनीति, धर्म, संप्रदाय, मजहब,योग साधना,समाज सुधार, व्यापार,उद्योग आदि के अंतर्गत आने वाले तथाकथित महान या बड़े कहे जाने वाले व्यक्तियों ने पूरी मानवता को बंधक बनाकर रखा हुआ है। कहने को तो ये तथाकथित बड़े लोग मानवता के रक्षक होने की शानदार वेशभूषा पहनकर आते हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा कुछ होता नहीं है। जनमानस इन तथाकथित बड़े लोगों का प्रतिरोध नहीं करे, इनसे प्रश्न न करे, इन पर संदेह नहीं करे या इन पर अपने आंख,कान, बुद्धि के सभी दरवाजे बंद करके स्वीकृति में मूंडी हिलाता रहे, इसके लिये भरपूर प्रयास किये जाते हैं।
आजकल एक शब्द बहुत प्रचलित हो गया है।वह शब्द है सैलीब्रिटीज।सैलीब्रिटीज से बचकर रहना। यदि आप अपने मालिक बनना चाहते हो तो सैलीब्रिटीज से बचकर रहना। यदि आप अपने आपको खुश, संतुष्ट, तृप्त रखना चाहते हो तो इस शब्द के पीछे छिपे हुये व्यक्ति से बचकर रहना। जितना पुस्तकीय, मीडिया, टीवी चैनल या प्रवचनीय बाहरी भीतरी ज्ञान लिया जाना संभव हो, उसे लेते रहना लेकिन अपने स्वयं को मत भूलना। ज्ञान अर्जित करने के प्रयास में दूसरों से इतना प्रभावित मत होना कि स्वयं को ही भूल जाओ। समकालीन युग के व्यक्ति के लिये यह सबके बड़ा खतरा है तो सबसे बड़ा अवसर भी है।
एक संप्रदाय के संप्रदाय गुरु दुनियावी लोगों की हर प्रकार की शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक समस्याओं का समाधान केवल कन्फैसन या विश्वास के जरिये ठीक करने का दावा करते हैं लेकिन जब खुद बिमार होते हैं तो कन्फैसन या विश्वास पर विश्वास नहीं करके चिकित्सा विज्ञान का सहारा लेते हैं।एक समूह के धर्माचार्य उस धर्माचार्य पर विश्वास करने मात्र से सांसारिक समस्याओं के समाधान के साथ साथ मोक्ष तक देने के वायदे करके लाखों लोगों को अपना अनुयायी बना लेते हैं लेकिन खुद अपराध, हत्या बलात्कार,गबन, अवैध कब्जे करने के अपराध में वर्षों से जेलों में सड रहे हैं।
एक अन्य मजहब के भिक्षु दिन रात करुणा, सहानुभूति, समानुभूति, भाईचारे, सौहार्द,प्रेम और विश्व बंधुत्व के उपदेश देते हैं लेकिन खुद ईर्ष्या,द्वेष, हिंसा, मतांतरण,छल,कपट करके सनातन धर्म और संस्कृति को मिटाने के लिये काम कर रहे हैं।
एक अन्य मजहब के अंधभक्त मूर्तिपूजा और मूर्तिपूजकों से दुश्मनी करके शांति,भाईचारे, मानवता और वैश्विक सह अस्तित्व की बातें करके खुद सबसे बड़े मूर्तिपूजक होकर पिछली कई सदियों से दुनिया में हिंसा, मारकाट, नरसंहार, युद्ध और आतंकवाद का पर्याय बन चुके हैं।
एक राजनीतिक दल-विशेष के नेता भारत के जमीनी मुद्दों से जनमानस का ध्यान भटकाकर अपनी राजनीति करते हैं और इसी को सनातन धर्म और संस्कृति का महान उपकार कहकर प्रचारित करते हैं।एक अन्य राजनीतिक दल के नेता आजादी के बाद से ही सनातन धर्म और संस्कृति के प्रतीकों का अपमान करते आ रहे हैं लेकिन वो अपने आपको भारत की सनातन विरासत का पोषक कहते नहीं थकते हैं। वाया श्रीलंका विदेशी मिशनरी शक्तियों द्वारा प्लांटिड किसी डैविड नामक व्यक्ति को बौद्ध मत में दीक्षित करके एक भारतीय नेता को अपना शिकार बनाकर भारत में सनातन धर्म और संस्कृति को बदनाम करने के एजेंडे पर काम करते हैं। किसी प्रसिद्धि प्राप्त खिलाड़ी द्वारा अपने घटिया उत्पाद का विज्ञापन करवाकर बहुराष्ट्रीय कंपनियां अरबों खरबों रुपये कमा लेते हैं , लेकिन करोड़ों लोगों की सेहत का कोई ध्यान नहीं रखते। किसी चरित्रहीन अय्याश फिल्मी अभिनेता द्वारा कुछ भी अनैतिक,असामाजिक फिल्मी डायलॉग का अंधानुकरण करके करोड़ों युवाओं की जिंदगी से खिलवाड़ करके उन्हें चरित्रहीन और उच्छृंखल भोगवादी बना देना प्रचलन में है।
धर्म, धम्म, मजहब, संप्रदाय आदि को एक पाखंडी रुढ़िवादी संगठन का रुप देकर प्रचारित करना,जबरदस्ती से मतांतरण करवाना या धर्म को राजनीति में प्रवेश करवाकर अपने इच्छित लक्ष्य पूरे करने का सर्वप्रथम प्रयास बौद्ध मतानुयायियों द्वारा किया गया था। इनके इस प्रयास के कारण भारत पर विदेशी हमलावरों के हमले होने शुरू हुये थे। अपने संप्रदाय को संगठन का रुप देकर जबरदस्ती से मतांतरण करवाने की बौद्ध मत के अनुकरण पर यह बुराई ईसायत और इस्लाम में गई थी। लाखों वर्षों से सनातन धर्म और संस्कृति में मतांतरण जैसा कुछ भी अस्तित्व में नहीं रहा है। और तो और अन्य मजहबों की मजहबी पुस्तकों में प्रक्षेप करने की बुराई भी बौद्ध मत से ही शुरू हुई थी। बाद में इस बुराई को ईसाई मिशनरियों ने सनातन धर्म और संस्कृति के विरुद्ध बहुतायत से प्रयोग किया है।वाद -विवाद और शास्त्रार्थ में सनातन धर्म के दार्शनिकों से बार बार पराजित होने के बाद बौद्ध विद्वानों ने गोतम रचित न्यायसूत्र, कपिल रचित साख्यसूत्र, वाल्मीकि रामायण, महाभारत, मनुस्मृति आदि ग्रंथों में बहुतायत से मिलावट की थी।
उपरोक्त दुष्प्रचार, जबरदस्ती,धींगामस्ती, मिलावट, मतांतरण आदि केवल और केवल सैलीब्रिटीज को मोहरा बनाकर किया जाता है।धूर्त,लूटेरे,शोषक और अति महत्वाकांक्षी लोग जब अपनी योग्यता और सामर्थ्य के बल पर कुछ नहीं कर पाते हैं तो सैलीब्रिटीज के कंधों पर बंदूक रखकर निशाना मारते हैं। धर्म, मजहब, संप्रदाय,अध्यात्म,योग,खेल, फिल्म, व्यापार, शिक्षा और राजनीतिक क्षेत्र के सैलीब्रिटीज का सहारा लेकर जनमानस को बेवकूफ बनाकर लूटपाट करने के लिये अंधाधुंध दुष्प्रचार किया जाता है। घटिया और गुणवत्ता रहित उपभोक्ता सामग्री तथा अनैतिक जीवनमूल्यों को जनमानस में प्रचलित करके उनके जीवन को बर्बाद करने मे इन सैलीब्रिटीज का महत्वपूर्ण योगदान है। कोई आपत्ति करे तो उसे तुरंत रुढ़िवादी कहकर उसका उपहास करके मुंह बंद करने के प्रयास किये जाते हैं।
योग -साधना की छोटी-छोटी तकनीकों को चुराकर मनोविज्ञानी लोग एनएलपी आदि बीसियों तकनीकों को उपलब्ध करवाकर सैलीब्रिटीज के माध्यम से जनमानस को सम्मोहित करके अपने कूड़ा कर्कट सामान को उच्च मानकों का प्रचारित करके बेच देने में सफल हो रहे हैं। विज्ञापन का बाजार केवल और केवल सैलीब्रिटीज को केंद्र में रखकर ही चलता है। घटिया,हानिकारक, गुणवत्तारहित और व्याधिग्रस्त करने वाला उपभोक्ता सामान बेचकर निर्माता कंपनियां भी मालामाल हो जाती हैं टीवी चैनल भी अरबपति बन जाते हैं तथा सैलीब्रिटीज भी मालामाल हो जाते हैं। लेकिन इनके इस धंधे का सर्वाधिक नुकसान सिर्फ और सिर्फ जनमानस को होता है।
भारत के एक सौ वर्ष पुराने तथाकथित नकली राष्ट्रवादी संगठन ने विज्ञापन,प्रचार और प्रसार के बल पर अपने आपको राष्ट्रवादी तथा अन्य सभी संगठनों को राष्ट्रविरोधी सिद्ध करके सत्ता को हथियाने में सफलता प्राप्त कर ली है।इस संगठन के लोगों ने भारत की आजादी के आंदोलन में इस आंदोलन और सभी क्रांतिकारियों का पुरजोर विरोध करके अंग्रेजों का साथ दिया था। अनेक बार क्रांतिकारियों की रेकी करके उन्हें पकड़वाने तक में इस संगठन के लोगों का हाथ है। लेकिन विज्ञापन, प्रचार, प्रसार,छल, कपट और धोखाधड़ी करके इन्होंने खुद को राष्ट्रवादी और क्रांतिकारियों को देशद्रोही सिद्ध करने में सफलता हासिल कर ली है। इन्होंने अपने एक नेता को सैलीब्रिटी बनाकर यह सब किया है।
साईकिल पर घूमने वाले एक बाबा ने योग और योग साधना की आड़ लेकर अपने आपको विश्व योगगुरु बतला बतलाकर सैलीब्रिटी बना लिया है।आज सभी उनको सनातन योग साधना का सर्वश्रेष्ठ और सर्वोच्च प्रतिनिधि मानकर चल रहे हैं। विज्ञापन, प्रचार, प्रसार,झूठ, कपट और धोखाधड़ी के बल पर आज वो सबसे बडे योगगुरु बन गये हैं। इसी के बल पर उन्होंने लाखों करोड़ रुपये कमा लिये हैं। नेताओं को वोट चाहियें और इन योगगुरु के पास लोगों की भीड़ मौजूद है।इनका भी काम हो रहा है तथा नेताओं का भी काम हो रहा है। इनके सहयोग से बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी मालामाल हो रही हैं।बस,बीच में जनमानस पिस रहा है। जनमानस की जमीनी समस्याओं की तरफ किसी का भी ध्यान नहीं है।
एक सैलीब्रिटी बन चुके क्रिकेट या फुटबॉल खिलाड़ी, फिल्मी अभिनेता, किसी जाति या वर्ग के सुधारक या किसी दक्षिणपंथी या वामपंथी या सैक्यूलर राजनीतिक दल के नेता को केंद्र में रखकर जनमानस के साथ कोई भी धोखाधड़ी की जा सकती है। किसी गुणवत्ता रहित उपभोक्ता सामग्री, किसी शीतल पेय, किसी शृंगार सामग्री, किसी चूर्ण , किसी जूस, किसी च्यवनप्राश, किसी सिगरेट, किसी गुटके, किसी हैल्थ ड्रिंक, किसी चड्डी बनियान, किसी योग साधना, किसी आश्रम , किसी योग केंद्र, किसी ऐलोपैथिक दवाई, किसी, किसी कोचिंग सेंटर, किसी स्कूल,किसी राजनीतिक विचारधारा तथा किसी सत्संग घर को भी किसी सैलीब्रिटी की मदद से टीवी चैनल, सोशल मीडिया और समाचार-पत्रों के माध्यम से धुआंधार प्रचार करके इनकी बिक्री को हजारों लाखों गुना बढ़ाया जा सकता है। पांच रुपये की वस्तु को सौ रुपये में बेचना इन सैलीब्रिटी की मदद से बेचना सहज हो जाता है। जनमानस इन सैलीब्रिटी से सम्मोहित होकर कूड़ा कर्कट को भी आसानी से खरीद लेता है। बलात्कारी,भ्रष्ट, चरित्रहीन और शोषक नेता तथा धर्मगुरु आदि मिलकर ब्रह्मचर्य, निष्पक्षता ,संयम और राष्ट्रभक्ति को बेच रहे हैं। सिगरेट, गुटका,पान मसाला, बीयर और शराब का विज्ञापन करने वाले अभिनेता और खिलाड़ी जनमानस को निरोगी काया और स्वस्थ मानसिकता का ब्रांड एंबेसडर बनकर बेवकूफ बना रहे हैं। योग साधना और अध्यात्म को व्यापार बना देने में अपना मानसिक संतुलन खो चुके योगाचार्य और धर्मगुरु जनमानस को अहिंसा ,सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य,अपरिग्रह, अनुशासन और मानसिक संतुलन के प्रवचन दे रहे हैं। जनमानस इनके बतलाये रास्ते पर चलकर अपने नित्यप्रति के जीवन को और भी अधिक चिंता, तनाव, हताशा, अकेलेपन, कुंठा, द्वेष,क्रोध और अंध-प्रतियोगिता में डुबाता जा रहा है। ऐसा क्यों है?
जब तक जनमानस के पास दर्शनशास्त्र के अंतर्गत तर्क, युक्ति और न्याय के तराजू पर तोलकर सही -ग़लत,अच्छे- बुरे और उपयोगी अनुपयोगी की पहचान करना नहीं आयेगा,तब तक जनमानस इन सैलीब्रिटीज द्वारा फैलाये गये सम्मोहन से मुक्त नहीं हो सकेगा। केवल इसीलिये भारतीय नेता, धर्मगुरु,कोरपोरेट घराने, पूंजीपति और शिक्षाविद् दर्शनशास्त्र विषय को भारतीय शिक्षा संस्थानों से इस विषय को मिटाने पर लगे हुये हैं। तार्किक,विचारक, युक्तिवादी, समझदार और बौद्धिक जनमानस कभी भी सैलीब्रिटीज के सम्मोहन का शिकार नहीं होता है। किसी भी उपभोक्ता सामग्री,औषधि, शृंगार सामग्री, हैल्थ पावडर, विचारधारा, राजनीतिक दल, धर्मगुरु, सुधारक आदि को वह तर्क, युक्ति, न्याय,विचार, चिंतन, संदेह, प्रश्न आदि करके ही स्वीकार या अस्वीकार करेगा।
यह जानकर आश्चर्य होगा कि सूचना- तंत्र के षड्यंत्र से सावधान करने वाले ‘नैक्सस’ पुस्तक के लेखक ‘हेरारी’ ने भी अपनी इस पुस्तक को लाखों की संख्या में विज्ञापन, प्रचार, प्रसार के सम्मोहन और सूचना -तंत्र का दुरुपयोग करके ही बेचने में सफलता प्राप्त की है।यह क्या हो रहा है?हर जगह पर धोखाधड़ी हो रही है। अजब-गजब तमाशा हो रहा है। अपने शिष्यों को मोह-माया से दूर रहने के प्रवचन देने वाले आज के हमारे धर्मगुरुओं और कथाकारों के पास अरबों की धन दौलत मौजूद है। करुणा,प्रेम,समता, अहिंसा का उपदेश देने वाले मठाधीश दूसरों की जीवनशैली पर प्रहार करके समाज में घृणा, द्वेष, ईर्ष्या,बदले की भावना, हिंसा, विषमता आदि को बढ़ाने का काम कर रहे हैं।जो स्वयं चरित्रहीन हैं,वो जनमानस के चरित्र सुधार पर शिविर आयोजित कर रहे हैं। और आश्चर्य देखिये कि कोई भी इन पाखंडियों और ढोंगियों पर प्रश्नचिन्ह नहीं लगा सकता है। यदि प्रश्नचिन्ह लगाने की हिम्मत की तो आपकी खैर नहीं। पता नहीं आपका कहां पर एक्सीडेंट हो जाये, आपको छेड़खानी के आरोप में फंसा दिया जाये,आप पर शांति भंग करने करने के आरोप में मुकदमा दर्ज हो जाये,आप पर सीबीआई और ईडी की रेड पड जाये या फिर आपको खाने में जहर देकर मार दिया जाये।
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आचार्य शीलक राम
दर्शनशास्त्र विभाग
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय
कुरुक्षेत्र -136119