**आई है होली गले से लगा लो**

**आई है होली गले से लगा लो**
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आई है होली गले से लगा लो,
बेरंग चोली , रंगों से भिगो दो।
प्रीत की रीत सदियों से चली है,
रंगों से भीगी गोपियों की गली है,
रंगों की तन मन बरखा बरसा दो।
आई है होली गले से लगा लो।
नैनों से नैनो की जंग छिड़ी है,
गोरियों के पीछे टोली पड़ी है,
मस्ती भरा नशा नजर से पिला दो।
आई है होली गले से लगा लो।
देखो जरा कोई बच के न जाए,
परदे के पीछे खड़ी गौरी शरमाए,
लाल , गुलाबी पीले रंग उड़ा दो।
आई है होली गले से लगा लो।
चढ़ा है नशा जैसे पी ली भंग हो,
रंगों की होली भीगा अंग–अंग हो,
समझ से परे ऐसा मुखड़ा बना दो।
आई है होली गले में लगा लो।
मय से भरे जाम निहारे मनसीरत,
मन को है भा गई प्यारी सी सूरत,
होली के बहाने सीने से लगा लो।
आई है होली गले से लगा लो।
आई है होली गले से लगा लो,
सूखी है चोली , रंगों से भिगो दो।
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सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)