तीर्थाटन संग दर्शन पूजन!
प्रभु कृपा से बना यह योग,
तीन पीढियों का सुलभ संयोग,
करने चले हम तीर्थाटन,
किये वहां पर प्रभु के दर्शन,
पाए प्रथम श्री दर्शन
श्री रंगनाथ महालिंगम,
भव्य विशाल अर हस्त कला का,
था वहां पर अदभुत संग!
अब लक्ष्य बनाया रामेश्वर धाम,
पहुंचने में हो गई थी शाम,
गेस्ट हाउस में किया विश्राम!
सुबह प्रातह: गतंव्य को ध्याये,
पंडित पुरोहितों के सानिध्य में,
जलाभिषेक संग पूजन वंदन,
श्री राम जी के निर्मित शिवलिंग पर,
फिर गये हनुमंत निर्मित शिवलिंग पर,,
तत्पश्चात बाईस कुण्डों में,
किया जल स्नान से अभिनंदन,
लिया भोग प्रसाद का चंदन!
दोपहरी कि तप्ति धूप में चलना,
कठिन हुआ था घुमना फिरना,
लौट चले तब हम गेस्ट हाउस को,
सांझ ढले फिर निकल पडे थे,
विभिषण के प्रथम लंका भिषेक स्थल को,
जहां प्रभु श्री राम ने किया था अभिषेक को,
भव्य मंदिर वहां बना है,
तीर्थ यात्रियों का मेला लगा है,
दर्शन वंदन कर आगे बढ़ गये!
रामसेतु के अभिनंदन करने,
सौ यौजन में फैले समुद्र के दर्शन करने,
हिलोरें मार रहा था जलंदर,
रामसेतु ढक गया है अंदर,
हमने बालू रेत से शिवलिंग बनाया,
आकर लहरों ने स्वयं में समाया!
अब अगला पढाव मीनाक्षी मंदिर था,
मदरै मे यह स्थित हुआ था,
भोर सबेरे हम निकल गए थे,
दोपहर से पहले वहां पहुंच गये थे,
पुनः पंक्ति में शामिल होकर ,
पूजन सामग्री संजोकर,
धिमै धिमै चिपक चिपक कर,
पहुंचे माता कै निवास स्थल पै,
भेंट चढ़ावा किया समर्पित,
लिया प्रसाद और तिलक,
फिर बढ गये शिव दर्शन मै,
भेंट चढ़ावा किया हवाले,
मंदिर के थे वहां पर रखवाले,
तद उपरांत भोजन पाया,
और अपना गंतव्य आगे बढाया,
अब मंजिल थी हमारी,
दैवि मां कन्याकुमारी,
निकल पडे थे हम उस दिशा को,
सांझ ढले पहुँचे थे उस स्थल को,
वहां पहुंच कर दर्शन पाए,
फल प्रसाद वहां चढ़ाए,
रित वहां पर है निराली,
पुरुष वर्ग से अर्ध वस्त्र उतारे,
रात्रि विश्राम को होटल शरणम्,
किया विश्राम शनव्यू विहंगम,
शुर्य देव यहां से प्रकट होते हैं,
उन्हें देखने लोग वहां पहुंचते हैं,
विहंगम दृश्य और अद्भुत नजारा,
अनुभव था यह अलौकिक हमारा ,
अब लौट चले हम अपने निवास पर,
सेवा रत्त है पुत्र जहां पर,
कर्नाटक राज्य का शहर बैंगलोर,
बनाया हुआ है उसने वहां ठौर,
इस तरह हमारी यात्रा हुई संपन्न,
लिए देव धूूरि का आलिंगन !!
यह अपना यात्रा वृतांत,
प्यास हुई नहीं अभी भी शांत,
जाने अब कब दर्शन होंगे,
किसी और स्थल पर हम जाएंगे,
रहे कृपा ईश्वर की पुत्र पौत्र संग,
बहुरानी और हम पर,
कर पाएंगे दर्शन हम सब मिलकर!!