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9 Mar 2025 · 1 min read

।।ये दुनिया।।

समझ ना आया दुनिया का रिवाज़।
कमजोर लोगों को सताती क्यों है।
चलें जो नेक रस्ते पर,
उन्हें ही रास्ते बताती क्यों है।
मैं बहुत सोच में रहता हूं अक्सर।
मुसीबत में और मुसीबत आती क्यों है।
अच्छे वक्त में होते साथ बहुत।
बुरे वक्त में सारा दोष हमपर लगाती क्यों है।
बताऊं क्या मैं,
इस दुनिया को दर्द अपना।
मल्हम की जगहा जख़्म को दबाती क्यों है।
अब ना करूं दर्द-ए-दिल बयां सबने सामने।
तसल्ली दे ना सकी,
मुझे और रुलाती क्यों है।
दिल से बस एक ही,
आवाज निकलती है अब।
परवाह नहीं है तेरी,
फिर तुझे बुलाती क्यों है।

बृन्दावन बैरागी”कृष्णा”

Language: Hindi
26 Views
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