यही सच है..

हृदय बीच बसा था भारत हर एक भारत वासी में
सब ईश्वर को पूजते थे कोई मक्का कोई काशी में,
इस राजनीति ने देश को जाने कितने टुकड़ों में बाँटा
मानव से अब धर्म है ऊपर धर्म के नाम पे सिर काटा,
पंडित क्षत्रिय वैश्य शूद्र,शिया सुन्नी सूफ़ी अहमदिया
बाँट बाँटकर इंसां के ज़ेहन में केवल ज़हर भर दिया,
धर्म के नाम पे देश बँटा,फिर लोग बँटे, फिर रंग बँटा
इस बँटवारे में जाने कितना लहू बहा और गला कटा
सुंदर भारत दिखा रहे सब अपनी अपनी फ़ंतासी में
उलझे हैं हम ब्राह्मण, हरिजन,अहीर गड़ेरी पासी में..