Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
4 Feb 2025 · 1 min read

When a photographer can’t change a scene, he changes his ang

When a photographer can’t change a scene, he changes his angle and lens to capture the best of that scene.

Similarly, when you can’t change a situation in your life, change your perspective and mindset to get the best out of that situation.

69 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.

You may also like these posts

I KNOW ...
I KNOW ...
SURYA PRAKASH SHARMA
चलो
चलो
हिमांशु Kulshrestha
लोगों के रिश्मतों में अक्सर
लोगों के रिश्मतों में अक्सर "मतलब" का वजन बहुत ज्यादा होता
Jogendar singh
ग़ज़ल सगीर
ग़ज़ल सगीर
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
जब सारे फूल ! एक-एक कर झर जाएँगे तुम्हारे जीवन से पतझर की बे
जब सारे फूल ! एक-एक कर झर जाएँगे तुम्हारे जीवन से पतझर की बे
Shubham Pandey (S P)
* कोई इतना बिख़र गया कैसे
* कोई इतना बिख़र गया कैसे
Dr fauzia Naseem shad
नस नस में तू है तुझको भुलाएँ भी किस तरह
नस नस में तू है तुझको भुलाएँ भी किस तरह
Dr Archana Gupta
*संविधान-दिवस 26 नवंबर (कुंडलिया)*
*संविधान-दिवस 26 नवंबर (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
जीवन यात्रा
जीवन यात्रा
अभिषेक पाण्डेय 'अभि ’
इतना भी अच्छा तो नहीं
इतना भी अच्छा तो नहीं
शिव प्रताप लोधी
"आईना"
Dr. Kishan tandon kranti
आजादी के दोहे
आजादी के दोहे
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
जिसका जैसा नजरिया होता है वह किसी भी प्रारूप को उसी रूप में
जिसका जैसा नजरिया होता है वह किसी भी प्रारूप को उसी रूप में
Rj Anand Prajapati
वर्ण पिरामिड
वर्ण पिरामिड
Rambali Mishra
मां भारती से कल्याण
मां भारती से कल्याण
Sandeep Pande
तेरे होने का जिसमें किस्सा है
तेरे होने का जिसमें किस्सा है
shri rahi Kabeer
तुम मुझे मेरा गिफ़्ट ये देना
तुम मुझे मेरा गिफ़्ट ये देना
MEENU SHARMA
अमावस सी है तेरी जुल्फें।
अमावस सी है तेरी जुल्फें।
Rj Anand Prajapati
पिता एक पृथक आंकलन
पिता एक पृथक आंकलन
Shekhar Deshmukh
*साधारण दण्डक* (208) नवीन प्रस्तारित
*साधारण दण्डक* (208) नवीन प्रस्तारित
रामनाथ साहू 'ननकी' (छ.ग.)
पिता' शब्द है जीवन दर्शन,माँ जीवन का सार,
पिता' शब्द है जीवन दर्शन,माँ जीवन का सार,
Rituraj shivem verma
ओ मैना चली जा चली जा
ओ मैना चली जा चली जा
ऐ./सी.राकेश देवडे़ बिरसावादी
3234.*पूर्णिका*
3234.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
दो गज असल जमीन
दो गज असल जमीन
RAMESH SHARMA
जीव के मौलिकता से परे हो,व्योम धरा जल त्रास बना है।
जीव के मौलिकता से परे हो,व्योम धरा जल त्रास बना है।
दीपक झा रुद्रा
भीतर से तो रोज़ मर ही रहे हैं
भीतर से तो रोज़ मर ही रहे हैं
सोनम पुनीत दुबे "सौम्या"
अंतहीन पीड़ा से
अंतहीन पीड़ा से
लक्ष्मी सिंह
यक्षिणी-18
यक्षिणी-18
Dr MusafiR BaithA
कामिल नहीं होता
कामिल नहीं होता
Kunal Kanth
दिल में दर्द है हल्का हल्का सा ही सही।
दिल में दर्द है हल्का हल्का सा ही सही।
अश्विनी (विप्र)
Loading...