मेरे अल्फाज़

मेरे अल्फाज़
मेरे विचार
मेरे एहसास
जब जब
जबरन खामोश रहे होंगे
यक़ीनन तड़फते रहे होंगे ।
चाहा तो होगा , बोलना
जुबां पर दस्तक दी होगी
कलम को कागज़ पर रखा होगा
मौन की हिदायत लिए ‘राजू’
जरूर कुछ पहरे रहे होंगे ।।
मेरे अल्फाज़
मेरे विचार
मेरे एहसास
जब जब
जबरन खामोश रहे होंगे
यक़ीनन तड़फते रहे होंगे ।
चाहा तो होगा , बोलना
जुबां पर दस्तक दी होगी
कलम को कागज़ पर रखा होगा
मौन की हिदायत लिए ‘राजू’
जरूर कुछ पहरे रहे होंगे ।।