महाकुंभ का स्नान

महाकुंभ का स्नान
प्रत्येक 12 वर्ष के बाद आता
जब बृहस्पति बृष राशि में आते हैं
तब 12 साल के अंतराल पर
सजता महाकुंभ का मेला।।
आध्यात्मिकता और संस्कृति के यह चारों धाम
प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक से उज्जैन
अमृत कलश की बिखरी बूंदों से
उत्पन्न हुए यह चार पवित्र स्थान।।
चंद्र सूर्य, गुरु आदि सभी ग्रह
जब उसी अवस्था में संचरण करते हैं।
उसी समय कुंभ पर्व का योग बनता है
तभी कुंभ महापर्व का आयोजन होता है।।
इस संगम पर करने से स्नान
आत्म बंधनों से मुक्ति मिलती है।
इससे मोक्ष प्राप्ति भी होती है
यह संगम त्रिवेणी कहलाती है।।
अपनी आशाओं और अभिलाषाओं को
हृदय में भरकर स्नान करते बारंबार
यही संस्कार हमारे भारतवर्ष के
अनमोल राष्ट्र की अनमोल कहानी।।
महाकुंभ के मेले में आए संत अनेक
विभूति से शरीर सजाए माथे पर भस्म लगाए
आंखों में तेज बसाए युगों युगों की
कथाओं से कुंभ को पवित्र कर जाए।।
हरमिंन्दर कौर
अमरोहा यूपी