करुण पुकार – डी के निवातिया
दिन दिनांक : मंगलवार, ०७ जनवरी-२०२५
विद्या : कविता
विषय : करुण पुकार
प्रसंग : द्रौपदी चीर हरण
मात्रा : १६, ( सोलह )
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राज सभा में वीर घने है
बाहुबली सब मौन धरे है,
चीर-हरण कुल वधु झेल रही,
लाज बचाने को चीख रही
करुण पुकार नयन भरे है,
पीड़ा इनकी कौन हरे है,
बैठे भुजबल सिर लटकाकर,
शब्द गले अपने अटकाकर,
आज सभी का ओज गया मर,
कृष्णा जीती कौन दया पर,
नारी तेरा अस्तित्व कच्चा,
इस जीने से मरना अच्छा,
पटरानी का ये हाल भया,
समझो राजा मर मान गया,
संकट भगिनी आज उतारो,
कान्हा आकर आप उबारो !!
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स्वरचित: डी के निवातिया