जिंदगी में इतना खुश रहो कि,
वह और तुम
डॉ राजेंद्र सिंह स्वच्छंद
जीवन और रोटी (नील पदम् के दोहे)
दीपक नील पदम् { Deepak Kumar Srivastava "Neel Padam" }
माशा अल्लाह, तुम बहुत लाजवाब हो
पर्वत, दरिया, पार करूँगा..!
हर किसी को नसीब नही होती ये जिंदगी।
*(गीता जयंती महोत्सव)* *श्रीमद्भगवद्गीता,गौमाता और भारतीय जनमानस की समस्याएं*
प्रोफेशनल वाद (भावुक, कार्यकारी, आणि व्यवसायिक )
* श्री ज्ञानदायिनी स्तुति *
करवा चौथ घनाक्षरी ( हास्य)
*परिमल पंचपदी--- नवीन विधा*
रामनाथ साहू 'ननकी' (छ.ग.)