Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 Nov 2024 · 5 min read

इज़राइल और यहूदियों का इतिहास

इज़राइल की कहानी

बहुत समय पहले, दुनिया के एक कोने में एक छोटा लेकिन ऐतिहासिक राष्ट्र बसा था, जिसे हम आज इज़राइल के नाम से जानते हैं। यह भूमि प्राचीन काल से ही कई सभ्यताओं और धर्मों का केंद्र रही है। इज़राइल की कहानी मुख्य रूप से तीन प्रमुख धर्मों—यहूदी धर्म, ईसाई धर्म, और इस्लाम से जुड़ी हुई है।

प्राचीन इज़राइल
प्राचीन काल में, इज़राइल क्षेत्र में कनानी लोग रहते थे, और बाद में यह भूमि यहूदी लोगों का घर बनी। बाइबल के अनुसार, यहूदियों के पूर्वज अब्राहम को ईश्वर ने इस पवित्र भूमि का वादा किया था। इसराइलियों ने मिस्र से भागकर मोसेस के नेतृत्व में इस भूमि पर अधिकार किया।

राजाओं का युग
करीब 1000 ईसा पूर्व, राजा दाऊद (David) ने यरूशलेम को इज़राइल की राजधानी बनाया और उनके पुत्र, राजा सुलैमान (Solomon) ने यरूशलेम में प्रसिद्ध सोलोमन का मंदिर बनवाया। यह समय इज़राइल के स्वर्ण युग के रूप में जाना जाता है। लेकिन सुलैमान की मृत्यु के बाद इज़राइल का राज्य दो हिस्सों में बंट गया—उत्तर में इज़राइल और दक्षिण में यहूदा।

प्रत्यावर्तन और संघर्ष
इतिहास में समय-समय पर इज़राइल पर बाहरी आक्रमणकारी हावी होते गए—असीरियाई, बाबिलोनियाई, और फिर रोमन साम्राज्य ने इज़राइल पर शासन किया। 70 ईस्वी में रोमन सेना ने यरूशलेम और यहूदी मंदिर को नष्ट कर दिया, जिसके बाद यहूदियों का बड़े पैमाने पर विस्थापन (डायस्पोरा) हुआ।

आधुनिक इज़राइल का उदय
युगों तक यहूदियों को अपनी मातृभूमि से दूर रहना पड़ा। लेकिन 19वीं शताब्दी के अंत में, यहूदी पुनरुत्थान आंदोलन (Zionist Movement) की शुरुआत हुई। इसका उद्देश्य यहूदियों के लिए फिर से इज़राइल में एक राष्ट्रीय घर बनाना था। द्वितीय विश्व युद्ध और होलोकॉस्ट की भयावह घटनाओं के बाद, यहूदियों के लिए एक सुरक्षित राष्ट्र की आवश्यकता और भी गहरी हो गई।

1948 में इज़राइल की स्थापना
1947 में संयुक्त राष्ट्र ने इज़राइल के विभाजन की योजना बनाई, जिसमें यहूदियों और अरबों के लिए अलग-अलग राज्य बनाए जाने थे। लेकिन यह योजना अस्वीकार हो गई, और इसके बाद संघर्ष शुरू हो गया। 14 मई 1948 को डेविड बेन-गुरियन ने इज़राइल के स्वतंत्रता की घोषणा की, और उसी समय आस-पास के अरब देशों ने इज़राइल पर हमला कर दिया।

संघर्ष और शांति प्रयास
1948 के बाद से, इज़राइल ने कई युद्ध देखे, जैसे कि 1967 का “सिक्स-डे वॉर” और 1973 का “योम किप्पुर युद्ध”। हर युद्ध के बाद इज़राइल का आकार बढ़ता गया, लेकिन उसके साथ ही अरब देशों और फिलिस्तीनियों के साथ संघर्ष भी बढ़ता गया।

आज इज़राइल एक विकसित और तकनीकी रूप से उन्नत राष्ट्र है, लेकिन इसका इतिहास संघर्षों, संस्कृति, और विभिन्न धर्मों की आस्थाओं का केंद्र रहा है। यरूशलेम आज भी तीन धर्मों के लिए सबसे पवित्र शहरों में से एक है—यहूदियों के लिए, ईसाइयों के लिए, और मुसलमानों के लिए। इज़राइल की कहानी इसी धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक जटिलता का प्रतीक है।

इज़राइल की यात्रा
यह कहानी सिर्फ एक देश की नहीं है, बल्कि मानवता की प्राचीन सभ्यताओं, विश्वासों, और संघर्षों की है।

यहूदियों का इतिहास

यहूदी इतिहास हजारों साल पुराना है और यह कई महत्वपूर्ण धार्मिक, सांस्कृतिक, और सामाजिक घटनाओं से जुड़ा हुआ है। यहूदी इतिहास की कहानी प्राचीन सभ्यताओं, निर्वासन, संघर्ष और पुनरुत्थान की दास्तां है। यह कहानी यहूदी धर्म की उत्पत्ति से शुरू होकर आज के आधुनिक युग तक फैली हुई है। आइए इसे प्रमुख समयसीमाओं के अनुसार समझते हैं:

1. प्राचीन काल और अब्राहम
यहूदी इतिहास की शुरुआत पैगंबर अब्राहम से मानी जाती है, जिन्हें यहूदी धर्म का संस्थापक कहा जाता है। अब्राहम का जन्म मेसोपोटामिया (आधुनिक इराक) में हुआ था, लेकिन वे ईश्वर के आदेश पर कनान (आधुनिक इज़राइल और फिलिस्तीन) की भूमि में बस गए। यहूदियों का मानना है कि ईश्वर ने अब्राहम और उनके वंशजों के साथ एक पवित्र अनुबंध किया और उन्हें यह भूमि दी।

2. मिस्र और मोसेस का समय
अब्राहम के वंशज याकूब (Jacob), जिनका दूसरा नाम इस्राएल था, उनके 12 पुत्रों से यहूदी जनजातियाँ बनीं। बाद में याकूब के वंशज मिस्र चले गए, जहाँ वे सैकड़ों साल गुलामी में रहे। मोसेस (मूसा) को यहूदियों के सबसे बड़े पैगंबरों में से एक माना जाता है। उन्होंने यहूदियों को मिस्र से स्वतंत्रता दिलाई और उन्हें सिनाई पर्वत पर ईश्वर की दस आज्ञाएँ (Ten Commandments) प्राप्त हुईं। यह घटना यहूदी धर्म का आधार बनी।

3. राजाओं का युग और यरूशलेम का निर्माण
कनान में बसने के बाद, यहूदी एक संगठित राज्य की स्थापना करने लगे। सबसे पहले राजा सॉल (Saul), फिर राजा डेविड (David) और उनके बाद सुलैमान (Solomon) ने यहूदियों को संगठित किया। राजा सुलैमान ने यरूशलेम में प्रसिद्ध सुलैमान का मंदिर (Solomon’s Temple) बनवाया, जो यहूदियों का सबसे पवित्र स्थल था। यह समय यहूदी इतिहास का स्वर्ण युग माना जाता है।

4. बाबिलोनियन निर्वासन
राजा सुलैमान की मृत्यु के बाद, यहूदी राज्य कमजोर हो गया और अंततः 586 ईसा पूर्व में बाबिलोनियाई राजा नबूकदनेज़र (Nebuchadnezzar) ने यरूशलेम पर हमला किया। उन्होंने सुलैमान के मंदिर को नष्ट कर दिया और यहूदियों को बाबिलोनिया (आधुनिक इराक) निर्वासित कर दिया। इसे “बाबिलोनियन निर्वासन” (Babylonian Exile) कहा जाता है। यह यहूदी इतिहास में एक बहुत ही दुखद समय था।

5. दूसरे मंदिर का निर्माण और रोमन कब्जा
539 ईसा पूर्व में फारसियों ने बाबिलोन पर विजय प्राप्त की, और फारसी राजा साइरस ने यहूदियों को अपनी मातृभूमि लौटने की अनुमति दी। उन्होंने यरूशलेम में दूसरा मंदिर बनवाया, जिसे दूसरा मंदिर काल (Second Temple Period) कहा जाता है। बाद में, यह क्षेत्र रोमन साम्राज्य के अधीन हो गया।

6. रोमन युग और यहूदी विद्रोह
70 ईस्वी में यहूदियों ने रोमन शासन के खिलाफ विद्रोह किया, लेकिन असफल रहे। रोमन सेनाओं ने यरूशलेम को नष्ट कर दिया और दूसरे मंदिर को भी गिरा दिया। इसके बाद यहूदियों को एक बार फिर से अपनी भूमि से निर्वासित कर दिया गया, जिसे यहूदी डायस्पोरा (Jewish Diaspora) कहा जाता है। यहूदी पूरी दुनिया में फैल गए, खासकर यूरोप, मध्य एशिया और उत्तरी अफ्रीका में।

7. मध्ययुगीन काल और यहूदी समुदायों का विकास
डायस्पोरा के समय में यहूदी यूरोप और मध्य पूर्व के विभिन्न हिस्सों में बसे। यूरोप में यहूदी समुदायों को बार-बार उत्पीड़न, धार्मिक असहिष्णुता, और नरसंहार (Pogroms) का सामना करना पड़ा। लेकिन इसके बावजूद, यहूदी धर्म और संस्कृति ने मजबूत आधार बनाए रखा। यहूदी लोग व्यापार, विज्ञान, और कला में महत्वपूर्ण योगदान देने लगे।

8. आधुनिक समय और ज़ायोनिस्ट आंदोलन
19वीं शताब्दी के अंत में, यूरोप में यहूदियों के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों के कारण एक आंदोलन शुरू हुआ जिसे ज़ायोनिज़्म कहा जाता है। इस आंदोलन का उद्देश्य यहूदियों के लिए फिर से उनके ऐतिहासिक घर, इज़राइल, में एक राष्ट्र स्थापित करना था। 1948 में, द्वितीय विश्व युद्ध और होलोकॉस्ट के बाद, संयुक्त राष्ट्र ने इज़राइल राज्य की स्थापना को मंजूरी दी, और यहूदी लोग अपनी प्राचीन भूमि में लौटने लगे।

9. होलोकॉस्ट और इज़राइल का निर्माण
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, नाज़ी जर्मनी ने यूरोप में यहूदियों के खिलाफ अत्याचार किए। करीब 60 लाख यहूदियों की हत्या कर दी गई, जिसे होलोकॉस्ट के नाम से जाना जाता है। इसके बाद, यहूदी लोगों के लिए एक सुरक्षित राष्ट्र की आवश्यकता और भी स्पष्ट हो गई। 1948 में, इज़राइल की स्थापना के साथ, यहूदियों को अपनी मातृभूमि फिर से प्राप्त हुई।

10. आधुनिक यहूदी समाज
आज, यहूदी दुनिया भर में फैले हुए हैं, लेकिन इज़राइल यहूदियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। यहूदी धर्म, संस्कृति, और परंपराएं आज भी बहुत मजबूत हैं। इज़राइल के अलावा, अमेरिका और यूरोप में भी यहूदी समुदाय महत्वपूर्ण संख्या में मौजूद हैं।

यहूदी इतिहास कठिनाइयों, संघर्षों, और असाधारण जीवटता की कहानी है। यह कहानी एक समुदाय की नहीं, बल्कि एक महान सभ्यता की है जिसने अपने अस्तित्व, धर्म और संस्कृति को सदियों तक बनाए रखा और दुनिया पर गहरा प्रभाव डाला।

Language: Hindi
2 Likes · 212 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.

You may also like these posts

मेरे मन के मीत
मेरे मन के मीत
Mamta Rani
এটা বাতাস
এটা বাতাস
Otteri Selvakumar
"जिन्दगी के कुछ रिश्ते हमेशा दिलो में बसा करते है।"
Brandavan Bairagi
कुंडलिया
कुंडलिया
sushil sarna
4311💐 *पूर्णिका* 💐
4311💐 *पूर्णिका* 💐
Dr.Khedu Bharti
गणगौर का त्योहार
गणगौर का त्योहार
Savitri Dhayal
जिस्म में अक़्सर
जिस्म में अक़्सर "लियोनी" व "मल्लिका" खोज लेने वाले केवल "मोन
*प्रणय प्रभात*
नसीब ने दिया हमको, हम तसव्वुर कर गये।
नसीब ने दिया हमको, हम तसव्वुर कर गये।
श्याम सांवरा
इम्तिहान
इम्तिहान
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
जय माँ शारदे🌹
जय माँ शारदे🌹
Kamini Mishra
*चलो तिरंगा फहराऍं हम, भारत के अभिमान का (गीत)*
*चलो तिरंगा फहराऍं हम, भारत के अभिमान का (गीत)*
Ravi Prakash
सिर्फ चुटकुले पढ़े जा रहे कविता के प्रति प्यार कहां है।
सिर्फ चुटकुले पढ़े जा रहे कविता के प्रति प्यार कहां है।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
" लिहाफ़ "
Dr. Kishan tandon kranti
ज्ञान प्रकृति का हम पाएं
ज्ञान प्रकृति का हम पाएं
Prithvi Singh Beniwal Bishnoi
दिल हमारा गुनहगार नही है
दिल हमारा गुनहगार नही है
Harinarayan Tanha
**सत्य**
**सत्य**
Dr. Vaishali Verma
दोहे _ चार
दोहे _ चार
Neelofar Khan
"सभी को खुश करने का असफल प्रयास कर रहा हूँ ll
पूर्वार्थ
संवेदना
संवेदना
Ekta chitrangini
सर्पीली सड़क
सर्पीली सड़क
अरशद रसूल बदायूंनी
प्रेम क्या है...
प्रेम क्या है...
हिमांशु Kulshrestha
आई गईल परधानी मंगरू
आई गईल परधानी मंगरू
सिद्धार्थ गोरखपुरी
जिस माहौल को हम कभी झेले होते हैं,
जिस माहौल को हम कभी झेले होते हैं,
Ajit Kumar "Karn"
तूं बता ये कैसी आज़ादी है,आज़ भी
तूं बता ये कैसी आज़ादी है,आज़ भी
Keshav kishor Kumar
वो लुका-छिपी वो दहकता प्यार—
वो लुका-छिपी वो दहकता प्यार—
Shreedhar
जीवन - अस्तित्व
जीवन - अस्तित्व
Shyam Sundar Subramanian
मेरी चाहत
मेरी चाहत
ललकार भारद्वाज
दो कदम
दो कदम
Dr fauzia Naseem shad
मेरा बचपन
मेरा बचपन
Dr. Rajeev Jain
जीवन को सफल बनाने का तीन सूत्र : श्रम, लगन और त्याग ।
जीवन को सफल बनाने का तीन सूत्र : श्रम, लगन और त्याग ।
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
Loading...