बे फिकर होके मैं सो तो जाऊं
बड़े बुजुर्गों ,माता पिता का सम्मान ,
The World at a Crossroad: Navigating the Shadows of Violence and Contemplated World War
में इंसान हुँ इंसानियत की बात करता हूँ।
*धरती हिली ईश की माया (बाल कविता)*
स्वाभिमानी व्यक्ति हैं चलते हैं सीना ठोककर
नन्हे-मुन्ने हाथों में, कागज की नाव ही बचपन था ।
मेरे गीतों के तुम्हीं अल्फाज़ हो
सुलझा हुआ सा समझते हैं मुझको लोग...
सम्बन्धों की भीड़ में, अर्थ बना पहचान ।
आप हर पल हर किसी के लिए अच्छा सोचे , उनके अच्छे के लिए सोचे
उम्मीदें जब बॅंध जाती है किसी से...