One day you will realized that happiness was never about fin
ओढ़े जुबां झूठे लफ्जों की।
अफ़वाह है ये शहर भर में कि हमने तुम्हें भुला रक्खा है,
षड्यंत्रों वाली मंशा पर वार हुआ है पहली बार।
*मनः संवाद----*
रामनाथ साहू 'ननकी' (छ.ग.)
जगतगुरु स्वामी रामानंदाचार्य
याद रखें, प्रेरणा स्थिर नहीं होती - यह घटती-बढ़ती रहती है। अ
कोई समझ नहीं पाया है मेरे राम को
हृदय में वेदना इतनी कि अब हम सह नहीं सकते
जबसे उनको रकीब माना है।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
मैं खोया हूँ मयखाने में...
मेरी बातें दिल से न लगाया कर
मोहमाया के जंजाल में फंसकर रह गया है इंसान