Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
30 May 2024 · 1 min read

“समय का भरोसा नहीं है इसलिए जब तक जिंदगी है तब तक उदारता, वि

“समय का भरोसा नहीं है इसलिए जब तक जिंदगी है तब तक उदारता, विनम्रता, परोपकार व दयालुता को महत्व देना चाहिए।”

3 Likes · 287 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.

You may also like these posts

होली (माहिया गीत)
होली (माहिया गीत)
Dr Archana Gupta
दिल से दिल गर नहीं मिलाया होली में।
दिल से दिल गर नहीं मिलाया होली में।
सत्य कुमार प्रेमी
नशे से बचो
नशे से बचो
GIRISH GUPTA
बीते पल
बीते पल
अनिल "आदर्श"
विनती
विनती
Saraswati Bajpai
जो सोचते हैं अलग दुनिया से,जिनके अलग काम होते हैं,
जो सोचते हैं अलग दुनिया से,जिनके अलग काम होते हैं,
पूर्वार्थ
हार मैं मानू नहीं
हार मैं मानू नहीं
Anamika Tiwari 'annpurna '
ऐसे थे पापा मेरे ।
ऐसे थे पापा मेरे ।
Kuldeep mishra (KD)
मुझ पे इल्ज़ाम लगाते हो मगर ये सोचो
मुझ पे इल्ज़ाम लगाते हो मगर ये सोचो
Neeraj Naveed
शहर की बस्तियों में घोर सन्नाटा होता है,
शहर की बस्तियों में घोर सन्नाटा होता है,
Abhishek Soni
"" *प्रेमलता* "" ( *मेरी माँ* )
सुनीलानंद महंत
धर्मसंकट / मुसाफिर बैठा
धर्मसंकट / मुसाफिर बैठा
Dr MusafiR BaithA
वसंत
वसंत
Madhavi Srivastava
समय
समय
Swami Ganganiya
"मोबाइल फोन"
Dr. Kishan tandon kranti
करें सभी से प्रीत
करें सभी से प्रीत
अवध किशोर 'अवधू'
आँसू, आहें, हिचकियाँ, उल्फत के  ईनाम ।
आँसू, आहें, हिचकियाँ, उल्फत के ईनाम ।
sushil sarna
🙅Fact🙅
🙅Fact🙅
*प्रणय प्रभात*
कवि
कवि
विशाल शुक्ल
Cottage house
Cottage house
Otteri Selvakumar
मनुष्य
मनुष्य
Johnny Ahmed 'क़ैस'
चार मुक्तक
चार मुक्तक
Suryakant Dwivedi
जय जय जय जय जय माँ दुर्गा
जय जय जय जय जय माँ दुर्गा
gurudeenverma198
देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः। नमो नमस्ते तुल
देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः। नमो नमस्ते तुल
Shashi kala vyas
शब्द रंगोंली
शब्द रंगोंली
लक्ष्मी सिंह
3706.💐 *पूर्णिका* 💐
3706.💐 *पूर्णिका* 💐
Dr.Khedu Bharti
सनातन धर्म की गूंज ब्रह्माण्ड के हर कोने में है हम प्रभु के
सनातन धर्म की गूंज ब्रह्माण्ड के हर कोने में है हम प्रभु के
Rj Anand Prajapati
स्वार्थ
स्वार्थ
Shutisha Rajput
उत्तंग पर्वत , गहरा सागर , समतल मैदान , टेढ़ी-मेढ़ी नदियांँ , घने वन ।
उत्तंग पर्वत , गहरा सागर , समतल मैदान , टेढ़ी-मेढ़ी नदियांँ , घने वन ।
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
देखूँ तो वो सामने बैठा हुआ है - संदीप ठाकुर
देखूँ तो वो सामने बैठा हुआ है - संदीप ठाकुर
Sandeep Thakur
Loading...