Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Mar 2024 · 1 min read

मैं उड़ना चाहती हूं।

आसमान की ऊँचाइयों में, मैं उड़ना चाहती हूं,
ख्वाबों की परवाह किए, खुद को मैं पाहुंचाना चाहती हूं।

पंखों की छाँव में, बादलों की मुस्कान में,
जिन्दगी के सफर को, हर पल नए रंग में देखना चाहती हूं।

खुली हवा में, हवाओं के साथ सरकना हूं,
मैं अपनी राहों में, हर रुकावट को चुराना चाहती हूं।

जीवन के संगीत में, स्वरों की लहराहट में,
मैं अपनी दुनिया को, पूरी तरह से समझना चाहती हूं।

उड़ान भरना है, अपनी आज़ादी के साथ,
मैं जिन्दगी को, खुली पंखों से झूमना चाहती हूं।

ऊँचाईयों को छूने की चाह में,
मैं जिंदगी के रंगों में खोना चाहती हूं।

हवाओं में स्वप्नों की परवाज,
किनारों को छोड़, मुझे आसमान में खोना चाहती हूं।

बादलों के साथ बदलना चाहती हूं मैं,
खुद को बे-हिसाब आज़ाद करना चाहती हूं।

हर रोज़ नयी राहों में चलकर,
मैं जिंदगी की हर खुशी को पाना चाहती हूं।

उड़ान भरने की आज़ादी, मेरा मकसद है,
मैं जिंदगी में खुद को पूरी तरह से खोना चाहती हूं।

Language: Hindi
157 Views
Books from Kanchan Alok Malu
View all

You may also like these posts

आदम का आदमी
आदम का आदमी
आनन्द मिश्र
इतवार का दिन
इतवार का दिन
Abhinay Krishna Prajapati-.-(kavyash)
मीडिया, सोशल मीडिया से दूरी
मीडिया, सोशल मीडिया से दूरी
Sonam Puneet Dubey
You don’t have to fake a smile this Christmas if your heart
You don’t have to fake a smile this Christmas if your heart
पूर्वार्थ
दो व्यक्ति जो वार्तालाप करते है वह है कि क्या ,वह मात्र शब्द
दो व्यक्ति जो वार्तालाप करते है वह है कि क्या ,वह मात्र शब्द
Ashwini sharma
अग्नि परीक्षा!
अग्नि परीक्षा!
Pradeep Shoree
निमन्त्रण पत्र
निमन्त्रण पत्र
NAVNEET SINGH
4372.*पूर्णिका*
4372.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
धरा हरी बनाने को पेड़ लगाओ
धरा हरी बनाने को पेड़ लगाओ
Prithvi Singh Beniwal Bishnoi
दिया है नसीब
दिया है नसीब
Santosh Shrivastava
हे राम,,,,,,,,,सहारा तेरा है।
हे राम,,,,,,,,,सहारा तेरा है।
Sunita Gupta
लौट कर वक़्त
लौट कर वक़्त
Dr fauzia Naseem shad
राख का ढेर।
राख का ढेर।
Taj Mohammad
डूब गए    ...
डूब गए ...
sushil sarna
- तेरी चाहत में -
- तेरी चाहत में -
bharat gehlot
सत्य की खोज
सत्य की खोज
सोनू हंस
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
समायोजन
समायोजन
Shyam Sundar Subramanian
चिलचिलाती धूप में निकल कर आ गए
चिलचिलाती धूप में निकल कर आ गए
डॉ. दीपक बवेजा
सांसे केवल आपके जीवित होने की सूचक है जबकि तुम्हारे स्वर्णिम
सांसे केवल आपके जीवित होने की सूचक है जबकि तुम्हारे स्वर्णिम
Rj Anand Prajapati
दोहा
दोहा
गुमनाम 'बाबा'
कलम बिकने नहीं देंगे....
कलम बिकने नहीं देंगे....
दीपक श्रीवास्तव
"सूखा सावन"
राकेश चौरसिया
😊अनुभूति😊
😊अनुभूति😊
*प्रणय*
कोरोना
कोरोना
लक्ष्मी सिंह
संसार
संसार
Dr. Shakreen Sageer
***
*** " हम तीन मित्र .........! " ***
VEDANTA PATEL
आजाद पंछी
आजाद पंछी
Ritu Asooja
दृष्टि
दृष्टि
Ajay Mishra
छठ परब।
छठ परब।
Acharya Rama Nand Mandal
Loading...