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4 Mar 2023 · 1 min read

💐Prodigy Love-30💐

Oh Dear!
Desperately,You put forward your words.
While,I told everything as joke.
That was only when,I made a proper acquaintance with your family.
I mean your heart and soul.
But you used shackles to bind my mind by your vehement words.
Really, I know.That was your self defence.
Ha.Ha.
But you again caged yourself against your wish.
Why?then,I needed your words.
From you,not a single word of my praise,I listen.
It might be fake in sense.but such was not occur.
Why?You were also half in mind and soul.
This decision was not your soul.
Was from your mind.
Let pray for this to God.
By which,He has made all the hurdles smooth.
Or You put on your anger from your mind.
And feel ecstasy.
Thanks.
©® Abhishek Parashar “Aanand”

Language: English
380 Views
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